
पटना। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार बिहार विधानसभा के अध्यक्ष निर्विरोध चुन लिए गए। आसन पर बैठने के बाद उन्होंने सदन संबोधित किया सभी सदस्यों को शुभकामनाएं दी और कहा कि पक्ष और विपक्ष दोनों महत्वपूर्ण है। उन्होंने आगे और क्या-क्या बातें कहीं? आइए जानते हैं…
18वीं विधानसभा के अध्यक्ष की कुर्सी संभालने के बाद भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और नौ बार के विधायक प्रेम कुमार ने सदन में अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने सभी सदस्यों को शुभकामनाएं दी। कहां की लोकतंत्र के इस मंदिर को मैं प्रणाम कर अपनी बात रखता हूं। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सर्वसम्मति से चुना जाना मेरे लिए गौरव का विषय है, परंतु उससे भी अधिक यह मेरे उत्तरदायित्व का संकेत है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सुंदरता इसी में है कि विविध विचारधाराएं एक ही मंच पर बैठकर राज्य के विकास हेतु सार्थक चर्चा करें। जनता की इच्छा है कि बिहार तेजी से विकसित हो, पारदर्शी ढंग से संचालित हो और विधायिका के प्रत्येक निर्णय से जनता का जीवन सहज, सुरक्षित और समृद्ध बने।
उन्होंने कहा कि हम सब पर यह दायित्व है कि जनता के इस विश्वास को निष्ठा, विनम्रता और प्रतिबद्धता के साथ निभाएं। लोकतंत्र की शक्ति जनप्रतिनिधियों की संवेदनशीलता और सदन की मयार्दा में निहित है। इसलिए आवश्यक है कि विचारों की विविधता के बीच संवाद के पुल बनाए जाएँ और असहमति का सम्मान करते हुए नीतियों की दिशा तय की जाए, ताकि विकास की धारा प्रवाहित हो सके।
अध्यक्ष ने कहा कि आज का यह क्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। नई विधानसभा नई ऊर्जा और नए संकल्पों के साथ आरंभ हो रही है। परंपराएँ हमें गरिमा देती हैं और नवाचार हमें दिशा। दोनों के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसा कार्यकाल रचना है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए अनुकरणीय उदाहरण बने। विचारों का टकराव स्वाभाविक है, परंतु मन और व्यवहार में संघर्ष नहीं होना चाहिए। यह हम सबका सौभाग्य है कि जनता ने हमें सेवा का अवसर दिया है।
‘बिहार विधानसभा स्मार्ट लेजिसलेटिव गवर्नेंस का मॉडल बने’-विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि मैं आश्वस्त करता हूं कि अध्यक्ष के आसन पर रहते हुए मेरे लिए सरकार और विपक्ष दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण होंगे। हमारा उद्देश्य एक ही है- बिहार की जनता की प्रगति और उनकी आकांक्षाओं की पूर्ति। मैं सदन के वरिष्ठ सदस्यों से



