
नई दिल्ली । बीएमसी चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर आरपीआई (ए) और महायुति के बीच तनाव बढ़ गया है। रामदास आठवले ने पार्टी को बाहर रखने को विश्वासघात बताया और 38 सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान किया।
महाराष्ट्र की सियासत में महायुति के भीतर खींचतान खुलकर सामने आ गई है। केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी आॅफ इंडिया (ए) के प्रमुख रामदास अठावने ने बीएमसी चुनाव के लिए सीट बंटवारे में अपनी पार्टी को बाहर रखे जाने को विश्वासघात करार दिया। उन्होंने साफ किया कि उनकी पार्टी 38 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि बाकी सीटों पर भाजपा और शिवसेना को समर्थन देती रहेगी।
रामदास आठवले ने कहा कि महायुति के गठन के बाद से उनकी पार्टी पूरी निष्ठा और मजबूती के साथ गठबंधन के साथ खड़ी रही। लेकिन बीएमसी चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर जो फैसला हुआ, उससे आरपीआई (ए) के कार्यकतार्ओं में भारी नाराजगी है। उन्होंने कहा कि देर रात केवल सात सीटों का प्रस्ताव देना व्यावहारिक नहीं था और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सीट बंटवारे पर क्यों भड़की आरपीआई (ए)
आठवले के मुताबिक, मुंबई में आरपीआई (ए) की ताकत वंचित बहुजन अघाड़ी से ज्यादा है, इसके बावजूद उनकी पार्टी को नजरअंदाज किया गया। इससे पूरे महाराष्ट्र में पार्टी कार्यकतार्ओं में आक्रोश है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ऐसे नेताओं में से नहीं है जो समय के हिसाब से बात बदलें।
कार्यकतार्ओं की गरिमा का सवाल-रामदास आठवले ने कहा कि पार्टी और कार्यकतार्ओं की गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने उम्मीदवारों की सूची जारी करते हुए कहा कि पार्टी की असली ताकत उसके कार्यकर्ता हैं। अगर कार्यकतार्ओं का सम्मान नहीं बचेगा, तो पार्टी का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा।
महायुति के साथ रहेंगे, लेकिन लड़ेंगे चुनाव
आठवले ने स्पष्ट किया कि आरपीआई (ए) महायुति के साथ बनी रहेगी। हालांकि, 38 से 39 सीटों पर ह्यफ्रेंडली फाइटह्ण के तहत पार्टी अपने उम्मीदवार उतारेगी। उन्होंने कहा कि अंबेडकरवादी समाज की सत्ता में भागीदारी बेहद जरूरी है, ताकि आम लोगों के लिए काम लगातार चलता रहे।
महायुति में अलग-अलग राह-बीएमसी चुनाव में जहां भाजपा और शिवसेना ने सीट बंटवारे की घोषणा कर दी है, वहीं महायुति की एक और सहयोगी पार्टी, एनसीपी, भी अलग राह पर है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी बीएमसी चुनाव अपने दम पर लड़ रही है।
इस बीच, महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों में 15 जनवरी को होने वाले चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख मंगलवार को समाप्त हो रही है। ऐसे में महायुति के भीतर सीटों को लेकर चल रही यह खींचतान चुनावी माहौल को और दिलचस्प बना रही है।



