गाजियाबाद
मीरपुर हिन्दू में सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के विरोध में धरना तेज
धरने में तीसरे दिन भी डटे ग्रामीण

भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) का मिला समर्थन
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी (गाजियाबाद)। लोनी देहात क्षेत्र के मीरपुर हिन्दू गांव में मंदिर में चल रहा सालिड वेस्ट मैनेजमेंट (डंपिंग) ग्राउंड के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। गांव के प्राचीन शिव मंदिर परिसर में चल रहे धरने को भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने अपना समर्थन देते हुए आंदोलन को और मजबूती प्रदान की है। आज धरने का तीसरा दिन रहा, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी देखी गई।
बीते दिन क्षेत्रीय ग्रामीणों के एक प्रतिनिधि मंडल ने भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत से मुलाकात कर डंपिंग ग्राउंड को लेकर अपनी समस्याएं और आशंकाएं उनके सामने रखीं। ग्रामीणों ने बताया कि आबादी के नजदीक कूड़े के निस्तारण और भंडारण से स्वास्थ्य, पर्यावरण और धार्मिक स्थलों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चौधरी राकेश टिकैत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शहर के कूड़े का निस्तारण या भंडारण गांवों की आबादी के पास किसी भी कीमत पर नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि भारतीय किसान यूनियन इस संघर्ष में उनके साथ खड़ी है और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
आज धरने के तीसरे दिन भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश संगठन मंत्री प्रवीण मलिक भी धरना स्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों को संबोधित किया। उनके साथ टिकैत टीम से बिल्लू प्रधान भी अपने समर्थकों सहित पहुंचे और आंदोलन को समर्थन दिया। नेताओं ने धरने को शांतिपूर्ण लेकिन मजबूती के साथ जारी रखने की अपील की।
धरना स्थल पर मौजूद ग्रामीणों का कहना है कि मीरपुर हिन्दू एक घनी आबादी वाला गांव है और यहां प्राचीन शिव मंदिर ग्रामीणों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में मंदिर परिसर के आसपास डंपिंग ग्राउंड या सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का संचालन न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है, बल्कि इससे क्षेत्र में बीमारियों और प्रदूषण का खतरा भी बढ़ेगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को तत्काल यहां से हटाया जाए या आबादी से दूर किसी वैकल्पिक स्थान पर स्थापित किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
धरने में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की भी बड़ी भागीदारी रही। पूरे क्षेत्र में इस आंदोलन को लेकर चर्चा का माहौल है और आने वाले दिनों में इसके और व्यापक होने की संभावना जताई जा रही है।


