असम

असम विश्वविद्यालय, सिलचर के 23वें दीक्षांत समारोह में आईजीपी पार्थ सारथी महंत को डीलिट डिग्री। 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

असम विश्वविद्यालय, सिलचर (एयूएस) ने सोमवार को आयोजित अपने 23वें दीक्षांत समारोह में असम पुलिस के महानिरीक्षक पार्थ सारथी महंत, आईपीएस को साहित्य डॉक्टर (डीलिट) की मानद उपाधि प्रदान की। यह उपाधि महन्त को रामकृष्ण मिशन विवेकानंद शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र, बेलूर मठ के प्रो-वाइस चांसलर स्वामी आत्मप्रियानंद द्वारा तीन दिवसीय दीक्षांत समारोह के उद्घाटन समारोह के दौरान सौंपी गई। इस वर्ष की मानद डीलिट उपाधि के अन्य प्राप्तकर्ता महिंद्रा एंड महिंद्रा समूह के प्रमुख उद्योगपति आनंद महिंद्रा रहे, हालांकि वे व्यक्तिगत रूप से पुरस्कार प्राप्त करने में असमर्थ रहे। पूर्व वायुसेना प्रमुख एवं असम विश्वविद्यालय के कुलपति अरूप राहा तथा कुलपति राजीव मोहन पंत भी 23वें दीक्षांत समारोह के उद्घाटन समारोह में उपस्थित थे, जहां 13,666 से अधिक सफल छात्रों को उनकी डिग्रियों के प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। 1999 बैच के आईपीएस अधिकारी पार्थ सारथी महंत वर्तमान में गुवाहाटी के पुलिस आयुक्त के पद पर भी कार्यरत हैं। उन्हें पुलिसिंग में सुधारवादी एवं जन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों एवं मानवीय मूल्यों पर आधारित फिल्म निर्माण एवं निर्देशन के रचनात्मक कार्य के लिए यह मानद उपाधि प्रदान की गई। विश्वविद्यालय द्वारा इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित होने पर कृतज्ञता व्यक्त करते हुए महंत ने अपने भाषण में कहा कि सामाजिक कार्य केवल पूर्णकालिक सामाजिक कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने कहा, “बल्कि यदि हम अपने कार्य को ईमानदारी से करें, तो वह स्वयं समाज के प्रति महान सेवा है और पुलिस अधिकारी के लिए यह जिम्मेदारी और भी अधिक है।” महंत ने आगे कहा कि जब किसी पुलिस अधिकारी को पुरस्कार या सम्मान मिलता है, तो वह केवल एक अधिकारी का नहीं, बल्कि पूरे दल का होता है। उन्होंने स्पष्ट किया, “कोई भी पुलिसकर्मी सुपरमैन नहीं है। हम अकेले अपना कार्य नहीं कर सकते और हमें हमेशा अपने दल का समर्थन चाहिए। “मुख्य अतिथि स्वामी आत्मप्रियानंद ने दीक्षांत समारोह में प्रेरणादायक एवं विचारोत्तेजक भाषण दिया। उन्होंने ‘सर्वभूतहिते रतः’ के दार्शनिक सिद्धांत पर जोर देते हुए कहा कि मानव होना केवल स्वयं के प्रति चिंता तक सीमित नहीं है, बल्कि पौधों, पशुओं एवं समस्त पारिस्थितिकी तंत्र के प्रति जिम्मेदारी भी शामिल है। उन्होंने गहन पारिस्थितिकी के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य प्रकृति पर आधिपत्य जमाने के लिए जन्मा नहीं है। उन्होंने चिंतन किया कि मनुष्य ब्रह्मांड का केंद्र नहीं, बल्कि एक व्यापक पारिस्थितिक तंत्र का सहभागी है।

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