घरेलू हिंसा व पोक्सो एक्ट पर प्रशिक्षण, किशोरियों को मिली कानूनी जानकारी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बोकारो। कसमार प्रखंड के खैराचातर एवं रघुनाथपुर गांव में ‘सहयोगिनी’ संस्था के तत्वावधान में किशोरियों एवं युवा महिलाओं के लिए एक दिवसीय कानूनी प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य घरेलू हिंसा, पोक्सो एक्ट और बाल अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाकर ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों को सशक्त बनाना रहा।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता बेरमो कोर्ट की अधिवक्ता शारदा देवी ने कहा कि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए कानून की जानकारी बेहद जरूरी है। उन्होंने पोक्सो एक्ट 2012 की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, अश्लील हरकत, अशोभनीय चित्र दिखाना या यौन उत्पीड़न गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। साथ ही जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और महिला हिंसा से जुड़े कानूनों पर चर्चा करते हुए उन्होंने संविधान द्वारा प्रदत्त समानता, स्वतंत्रता और शोषण के विरुद्ध मौलिक अधिकारों की जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान बाल विवाह और दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों पर भी कड़ा प्रहार किया गया। अधिवक्ता शारदा देवी ने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि बोकारो जिले में बाल विवाह की दर 26 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल विवाह कराना या उसमें सहयोग करना दंडनीय अपराध है, जिसमें जेल की सजा का प्रावधान है। वहीं घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत महिलाओं को घर के भीतर मिलने वाले सुरक्षा और संरक्षण अधिकारों से भी अवगत कराया गया।
सहयोगिनी संस्था के समन्वयक प्रकाश कुमार महतो ने बताया कि संस्था प्रखंड के 30 गांवों में किशोरियों और महिलाओं के नेतृत्व क्षमता विकास पर कार्य कर रही है। उन्होंने सावित्री बाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, मुख्यमंत्री मैया सम्मान योजना एवं मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना जैसी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ने के लिए किशोरियों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर समूहों के माध्यम से किशोरियों को प्रशिक्षित कर हिंसा के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए तैयार किया जा रहा है।
कार्यक्रम में श्वेता कुमारी, पायल कुमारी, अमृता कुमारी, साक्षी कुमारी, गुलाबी कुमारी, पूजा कुमारी, प्यासा कुमारी, नीलम, प्रतिमा, बबिता, अंजलि, सपना, खुशी, प्रीति, रूपा कुमारी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं एवं किशोरियां उपस्थित रहीं।




