
नई दिल्ली । पाकिस्तान सेना के अधिकारियों ने बताया कि बलूचिस्तान प्रांत में 12 अलग-अलग स्थानों पर सुरक्षा बलों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और नागरिकों पर हमला करने वाले उग्रवादियों के खिलाफ अभियान चलाया गया था। इस अभियान में 92 उग्रवादियों की मौत हो गई।
भारत ने रविवार को बलूचिस्तान में शांति भंग करने में कथित भारतीय भूमिका को लेकर पाकिस्तान के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि यह पाकिस्तान की अपनी आंतरिक विफलताओं से ध्यान हटाने की पुरानी रणनीति है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘हम पाकिस्तान की ओर से लगाए गए बेबुनियाद आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हैं। ये उसकी अपनी आंतरिक समस्याओं से ध्यान भटकाने की सदाबहार रणनीति के अलावा कुछ नहीं हैं।’
पाकिस्तान को भारत का मुंहतोड़ जवाब-रणधीर जायसवाल ने कहा कि हर बार किसी हिंसक घटना के बाद इस तरह के निराधार आरोप दोहराने के बजाय पाकिस्तान को क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांगों पर ध्यान देना चाहिए। जायसवाल ने पाकिस्तान के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि वहां दमन, क्रूरता और मानवाधिकार उल्लंघनों का इतिहास जगजाहिर है।
भारतीय विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान सेना के उस दावे के बाद आई है, जिसमें कहा गया था कि भारत बलूचिस्तान में शांति भंग करने के प्रयासों में शामिल आतंकवादी तत्वों का समर्थन कर रहा है।
बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना ने मारे 92 उग्रवादी-पाकिस्तान सेना के अनुसार, बलूचिस्तान प्रांत में चलाए गए कई आतंकवाद-रोधी अभियानों में कम से कम 15 पाकिस्तानी सैनिक और 92 उग्रवादी मारे गए हैं। सेना ने बताया कि ये अभियान तब शुरू किए गए, जब जातीय बलूच समूहों से जुड़े उग्रवादियों ने क्वेटा, मस्तूंग, नुश्की, दल्बंदीन, खारन और पंजगुर सहित कई इलाकों में हमले किए।
बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने कहा कि ये हमले प्रांत में क्वेटा, ग्वादर, मकरम, हुब, चमन, नसीराबाद सहित विभिन्न स्थानों पर किए गए। वहीं, संघीय सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने जियो न्यूज चैनल पर अभियानों में 15 सुरक्षाकर्मियों की मौत की पुष्टि की, लेकिन कहा कि जब आतंकवादियों ने ठिकानों पर हमला किया, तो सुरक्षा बल सतर्क थे और उन्होंने इन हमलों को सफलतापूर्वक विफल कर दिया, जिससे आतंकवादी भागने पर मजबूर हो गए।



