गाजियाबाद
लोनी बॉर्डर में ‘कानून’ की छांव में फल-फूल रहा सट्टा कारोबार
पुलिस की चुप्पी पर फिर उठे सवाल
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : लोनी बॉर्डर थाना क्षेत्र की उत्तरांचल कॉलोनी में शराब के ठेके के पास इन दिनों सट्टे का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ पुलिस चौकी और थाने से कुछ दूरी पर ही संचालित हो रहा है, लेकिन सट्टा संचालकों के खिलाफ कार्केयवाही नाम पर सन्नाटा पसरा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अवैध धंधा दोपहर से लेकर शाम तक बेखौफ तरीके से संचालित होता है, मानो किसी ‘अदृश्य संरक्षण’ की छतरी तले चल रहा हो।
बताया जा रहा है कि सट्टेबाज बाकायदा पर्चियां काटकर दांव लगवा रहे हैं और आसपास खड़े लोगों की भीड़ इस बात का सबूत है कि कारोबार छोटा-मोटा नहीं, बल्कि संगठित रूप ले चुका है। गरीब और मजदूर तबके के लोग लालच में अपनी दिनभर की मेहनत की कमाई हारकर घर लौट रहे हैं। नतीजा यह कि परिवारों के चूल्हे ठंडे पड़ रहे हैं और कई घरों में कलह का माहौल बन रहा है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि रुपए हारने के बाद कई लोग नशे और चोरी जैसी बुरी आदतों की ओर बढ़ रहे हैं। यानी सट्टा सिर्फ जेब ही नहीं, समाज की जड़ों को भी खोखला कर रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले लोनी बॉर्डर थाने के पास चल रहे सट्टे की खबरें सुर्खियों में आई थीं, जिसके बाद दिखावे के तौर पर वह अड्डा बंद कर दिया गया। लेकिन जैसे ही मामला ठंडा पड़ा, कारोबार ने दूसरी जगह ‘नई दुकान’ सजा ली। अब सवाल यह उठता है कि क्या सट्टेबाजों को पहले से पता रहता है कि पुलिस कब आंख मूंदेगी और कब दिखावे की कार्रवाई करेगी?
क्षेत्र में चर्चा है कि अगर पुलिस चाहे तो ऐसे अवैध धंधों पर लगाम लगाना मुश्किल नहीं, लेकिन यहां तो हालात ऐसे हैं जैसे ‘सब कुछ देखकर भी कुछ न देखना’ ही जिम्मेदारी बन गई हो। लोग तंज कसते हुए कहते हैं कि शायद सट्टेबाजों ने पुलिस से बेहतर ‘मैनेजमेंट’ सीख लिया है।
अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन इस खुलेआम चल रहे सट्टे के खेल पर सख्ती दिखाता है या फिर यह धंधा यूं ही गरीबों की जेब काटता रहेगा और कानून व्यवस्था सिर्फ कागजों में ही नजर आती


