मुरादाबाद

जल्दी मुख्यमंत्री से मिलेगा पार्षद प्रतिनिधि मंडल उजागर होगा नगर निगम में टैंडरों को लेकर हो रहा भ्रष्टाचार 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मुरादाबाद। नगर निगम के पार्षद एवं कार्यकारिणी सदस्य विनोद शर्मा ने नगर निगम मे निर्माण कार्यों के टैंडरों में हो रहे भ्रष्टाचार की कलई खोल दी उन्होंने सोशल मीडिया पर विडियो वायरल करते हुए नगर निगम में निर्माण कार्य के टैंडरों में हो रहे भ्रष्टाचार पर कहा कि जहां साल दो साल पहले इसी नगर निगम में टैंडर 30-35% ब्लो जाते थे और कम रुपए में ज्यादा विकास कार्य होते थे आज उसी नगर निगम में टैंडर मेनेज कराकर 25,30,35,60 पैसे तक ब्लो डलवाये जा रहें हैं और 10 लाख का टैंडर 9 लाख 90 हजार 9 लाख 95 हजार में स्वीकृत हो रहें हैं जिससे सरकार को हर लिस्ट पर करोड़ों रुपए का चूना लग रहा है उन्होने यह भी कहा कि ई टैंडरिंग प्रक्रिया में भी एक ही कंपनी को भरपूर काम मिल रहें हैं और इस कंपनी द्वारा काम होने के बाद बिल भी एक ही जेई जिनका नाम किशनलाल है वो ही बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एक साल में 400 करोड़ के निर्माण कार्यों की कुंडली मेरे पास है जिसमें सरकार को लगभग 120 करोड़ का चूना लगाया जा चुका है। विडियो की जब पड़ताल की गई तब कुछ और बातें खुलकर सामने आई पता चला कि शासनादेश है कि टैंडर लेने के लिए ठेकेदार को 10% की एफ डी आर लगानी पड़ती है जिसमे से 5% काम होने के एक साल बाद और शेष 5% पांच साल बाद रिलीव होती है परंतु ऐसी सांठगांठ वाली निर्वाणा नामक कंपनियों की एफ डी आर भी काम कराने के बाद निकाल दी जाती है और भुगतान भी तुरंत किया जाता है जबकि और ठेकेदार भुगतान के लिए ठोकरें खाते हैं नाम न बताने की शर्त पर कुछ अन्य पार्षदों ने भी मुंह खोलते हुए कहा कि नगर निगम में जब से नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल आयें हैं तब से टैंडर ब्लो नहीं डालने दिए जा रहे हैं और जो ठेकेदार ब्लो डालता भी है उसके टैंडर निरस्त कर दिए जाते हैं पिछले एक डेढ़ साल के दरमियान नगर आयुक्त सरकार को हकीकत में करोड़ों रुपए का चूना लगा चुके हैं नगर आयुक्त ने वो शर्तें लगा रखी हैं जिसका कोई औचित्य नहीं है एन ए बी एल लैब सर्टिफिकेट जो की सबको एक ही फर्म मुहैया करा रही है इसकी भी जांच होनी चाहिए कि वो फर्म वास्तव में है या सर्टिफिकेट देने के लिए वैध है पार्षदों ने यह भी कहा कि हमें समझ नहीं आ रहा कि जब टाइल्स ब्रिक और क्यूब की जांच पीडब्ल्यूडी से करायी जा रही है तो इस एन ए बी एल सर्टिफिकेट का क्या औचित्य रह गया यह शर्त चेहते ठेकेदारों के अलावा कोई टैंडर न डाल सके इस वजह से लगाई गई है पार्षदों ने यह भी बताया कि कई पार्षदों ने महापौर से शिकायत की पर उन्होंने भी चुप्पी साध ली और भविष्य में वार्ड में काम न लगाने वार्ड में काम किए ठेकेदारों का भुगतान न कराने की धमकी देते हैं सूत्र बताते है कि इस भ्रष्टाचार करने की वजह से ही नगर आयुक्त वर्षों से जमें हुए मुरादाबाद में ही जेई से एई बने विजेंद्र यादव,जेई से एई बने किशन लाल और जेई शिव मोहन का तबादला होने के बावजूद भी आजतक रिलीव नहीं कर रहें हैं परंतु अब हम ये भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करेंगे जल्दी पार्षदों का एक प्रतिनिधि मंडल सीएम साहब से मिलकर इस भ्रष्टाचार को विस्तार से उनके सामने उजागर करेगा।
सारे प्रकरण पर नगर निगम का पक्ष जानने के लिए नगर आयुक्त से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई परंतु फोन रिसीव नहीं हो पाया महापौर ने वो ही पुराना रटा-रटाया जबाव दिया कि मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है इस विषय में नगर आयुक्त बतायेंगे दोनों के इस रवैए से यह प्रतीत होता है कि पार्षद विनोद शर्मा द्वारा लगाए आरोपों में आखिर जान तो है अब देखना है कि आखिर इस सारे मामले पर कोई कार्यवाही होती है या मुरादाबाद में ऐसे ही भ्रष्टाचार पनपता रहेगा।
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