लखनऊ

लखनऊ: IAS रिंकू सिंह राही का तबादला, शाहजहांपुर विवाद के बाद राजस्व परिषद भेजे गए

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार ने 2022 बैच के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही का तबादला शाहजहांपुर के पुवायां तहसील में उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के पद से हटाकर राजस्व परिषद, लखनऊ में अटैच कर दिया है। यह कार्रवाई शाहजहांपुर में एक वकील के मुंशी को खुले में शौच करने पर उठक-बैठक करवाने और इसके बाद वकीलों के विरोध के चलते राही द्वारा स्वयं उठक-बैठक करने की घटना के बाद हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

विवाद का विवरण:

रिंकू सिंह राही ने 28 जुलाई 2025 को पुवायां तहसील में एसडीएम का कार्यभार संभाला था। अगले दिन, 29 जुलाई को तहसील परिसर का निरीक्षण करते समय उन्होंने एक वकील के मुंशी, विजय (38 वर्ष), को दीवार के पास लघुशंका करते देखा। राही ने स्वच्छता नियमों का हवाला देते हुए मुंशी को कान पकड़कर उठक-बैठक करने की सजा दी। इस कार्रवाई से नाराज वकीलों ने तहसील परिसर में धरना शुरू कर दिया, यह दावा करते हुए कि तहसील के शौचालय गंदे होने के कारण मुंशी ने बाहर शौच किया।

विरोध को शांत करने के लिए राही धरना स्थल पर पहुंचे और वकीलों के सामने स्वयं पांच बार उठक-बैठक कर माफी मांगी, यह स्वीकार करते हुए कि तहसील की स्वच्छता उनकी जिम्मेदारी है। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा शुरू हुई। कुछ ने राही की विनम्रता की सराहना की, जबकि अन्य ने इसे प्रशासनिक कमजोरी का प्रतीक माना।

आधिकारिक बयान:

रिंकू सिंह राही ने कहा, “मेरा उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था। मैंने स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कदम उठाया। जब वकीलों ने शौचालयों की स्थिति का मुद्दा उठाया, तो मैंने अपनी जिम्मेदारी स्वीकारी और उठक-बैठक की।” वकील वीरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि राही ने माफी मांगकर और उठक-बैठक कर स्थिति को संभाला, जिसके बाद वकीलों ने धरना समाप्त किया।

राही इससे पहले 2009 में मुजफ्फरनगर में समाज कल्याण अधिकारी के रूप में 83-100 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले का पर्दाफाश करने के लिए चर्चा में रहे थे। इस कारण उन पर जानलेवा हमला हुआ, जिसमें उनकी एक आंख की रोशनी प्रभावित हुई। पुवायां में पहले से ही वकील तहसील प्रशासन के खिलाफ ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र न बनने को लेकर धरने पर थे, जिसने इस घटना को और जटिल बना दिया।

तबादले का कारण:

हालांकि सरकार ने तबादले का आधिकारिक कारण नहीं बताया, लेकिन माना जा रहा है कि वकीलों के विरोध और वायरल वीडियो से उत्पन्न विवाद के बाद यह निर्णय लिया गया। X पर कुछ पोस्ट्स में दावा किया गया कि बार काउंसिल की शिकायत के बाद यह कार्रवाई हुई।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया:

शाहजहांपुर के जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन राही की कार्रवाई और उनके तबादले ने प्रशासनिक हलकों में चर्चा को जन्म दिया है। यह घटना स्वच्छता, प्रशासनिक अनुशासन और सार्वजनिक छवि जैसे मुद्दों पर बहस का विषय बनी हुई है।

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