बाराबंकी

9 साल पुराने मारपीट मामले में तीन आरोपी दोषमुक्त विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट ने साक्ष्यों के अभाव में सुनाया अहम फैसला

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 

बाराबंकी जनपद के मसौली थाना क्षेत्र से जुड़े वर्ष 2016 के एक चर्चित मारपीट मामले में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय संख्या–15, बाराबंकी ने लगभग 9 वर्षों तक चले विचारण के बाद अभियोजन पक्ष द्वारा आरोपों को संदेह से परे सिद्ध न कर पाने के कारण विपिन, जयशंकर व सतीश को दोषमुक्त कर दिया है मामला NCR संख्या 140/2016, धारा 323 व 504 आईपीसी से संबंधित था। अभियोजन के अनुसार दिनांक 31 अक्टूबर 2016 की रात लगभग 10:30 बजे वादी मो0 शकील के साथ कथित रूप से गाली-गलौज एवं मारपीट की घटना हुई थी। वादी द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर पुलिस ने विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया था। गवाही में विरोधाभास, अभियोजन की कहानी कमजोर विचारण के दौरान न्यायालय में प्रस्तुत मौखिक एवं अभिलेखीय साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया गया। न्यायालय ने पाया कि मुख्य गवाह की गवाही में गंभीर विरोधाभास हैं। बचाव पक्ष की जिरह में यह तथ्य भी सामने आया कि घटना दीपावली के दिन हुई बताई गई थी, जहां पटाखों की आवाज और भगदड़ की स्थिति थी, जिससे चोट लगने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने यह भी माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित करने में असफल रहा। मात्र आरोप पत्र और असंगत गवाही के आधार पर आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध साक्ष्य अभियुक्तों के विरुद्ध अपराध सिद्ध करने हेतु पर्याप्त नहीं हैं। अतः विपिन, जयशंकर एवं सतीश को धारा 323 व 504 आईपीसी से दोषमुक्त किया जाता है।
हालांकि न्यायालय ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 437(ए) के अंतर्गत आवश्यक अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। न्याय की जीत, कानून पर भरोसा कायम इस फैसले के बाद आरोपियों एवं उनके परिजनों में राहत की सांस ली गई। यह निर्णय एक बार फिर साबित करता है कि भारतीय न्याय प्रणाली साक्ष्यों के आधार पर ही निर्णय देती है, न कि केवल आरोपों पर।
फैसले की तारीख: 20 जनवरी 2026
न्यायाधीश: हरिहर कुमार
न्यायालय: विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट, न्यायालय संख्या–15, बाराबंकी
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