धनबाद

कतरास शाखाटांड़ फाटक नंबर 1 में स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर फाटक को तोड़ते हुए जा फंसी

Scorpio went out of control and got stuck at Katras Shakhatand gate number 1 after breaking the gate

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
धनबाद। कतरास क्षेत्र के शाखा टांड़ फाटक न०- 1 में मंगलवार को लगभग 2:00 बजे रात्रि एक काले रंग की स्कॉर्पियो जे एच 10 सी कियू 7865 जिसमें पुलिस का स्टीकर चिपका हुआ है उक्त गाड़ी फाटक को क्षतिग्रस्त करते हुए फाटक में ही जा फंसी जानकारों की माने तो यह फाटक में कोई नई घटना नहीं है ऐसी घटना प्रतिदिन छोटे बड़े गाड़ियों से होती रहती है यदि हम इस फाटक को दुर्घटना फाटक कहे तो कोई अतिशौक्ति नहीं होगी फील वक्त घटना के बाद वाहन चालक घटनास्थल से फरार हो गया और रेलवे को भारी नुकसान हुआ है। आगे आपको बताते चले की धनबाद जिले में एक ऐसा खौफनाक रेलवे फाटक है जिसका नाम सुनते ही लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं — शाखा टांड़ फाटक। ये वही जगह है जहां ज़िंदगी और मौत का फैसला हर घंटे, हर मिनट सड़क पर चलती गाड़ियों की किस्मत पर टिका होता है। यह फाटक हादसों का प्रतीक बन चुका है। और इसकी वजह कोई रहस्यमयी ताकत नहीं, बल्कि सरकार की वो बीमार और अंधी व्यवस्था है जो सिर्फ फाइलों में योजनाएं घुमाती है, मगर जमीन पर एक बोर्ड तक नहीं टांग पाती। मौत की लाइन” जहां NH-32 घुटनों पर आ जाती है। NH-32 यानी राजगंज-महुदा मुख्य मार्ग जो पूरे 32 किलोमीटर तक फोर-लेन है — लेकिन जैसे ही लिलोरी फाटक आता है, चारों लेन सिमटकर दो लेन में दम तोड़ देती हैं। ना कोई सिग्नल, ना चेतावनी बोर्ड, ना रुकने की व्यवस्था। यहां जो रफ्तार में होता है, वह या तो घायल होकर रुकता है या फिर सीधे श्मशान की ओर रवाना होता है। “मोतियाबिंद वाले अफसर” और लाचार फाइलें, यह दुर्घटनाओं का सिलसिला नया नहीं है। ये सालों पुराना है। मगर अफसरों को शायद ‘मोतियाबिंद’ हो गया है ना उन्हें खतरा दिखता है, ना जनता की चीखें सुनाई देती हैं। सरकारी योजनाएं यहां आती हैं, कुछ अफसर उन्हें पलटते हैं, फिर फाइलें घूमती हैं और वहीं घूमते-घूमते धूल फांकने लगती हैं। शायद इन्हीं अफसरों ने कभी UPSC, JPSC जैसी परीक्षाएं पास की थी, मगर असली परीक्षा ज़िम्मेदारी की है, जिसमें ये फेल हो चुके हैं। सरकार बताए क्या किसी वीआईपी को मरना होगा, तब होगा काम? हर दिन यहां स्कूल बसें, एम्बुलेंस, बाइक, ट्रक सब खौफ के साये में गुजरते हैं। प्रशासन को क्या चाहिए? कोई विधायक, मंत्री या जज इस फाटक पर हादसे का शिकार हो जाए, तभी क्या नींद खुलेगी? आम जनता की लाशें क्या अब गिनती में नहीं आतीं?

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