असम

असम में राज्यसभा चुनाव में नया मोड़। 

एआईयूडीएफ विधायक ने एनडीए उम्मीदवार प्रमोद बोरों को दिया समर्थन, एक ने पार्टी से दिया इस्तीफ़ा। 

 नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 

असम की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर गुरुवार को चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया। एनडीए के उम्मीदवार और यूपीपीएल के शीर्ष नेता प्रमोद बोरों ने आज अपना नामांकन दाखिल किया, लेकिन सबसे बड़ी खबर यह रही कि विपक्षी पार्टी एआईयूडीएफ के तीन विधायकों ने अप्रत्याशित रूप से उनके समर्थन में दस्तखत कर दिए। प्रमोद बोरों ने भाजपा के दोनों उम्मीदवारों के साथ मिलकर नामांकन पत्र दाखिल किया। नियमों के मुताबिक किसी भी राज्यसभा उम्मीदवार के नामांकन के लिए कम से कम 20 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। प्रमोद बोरों के समर्थनकर्ताओं की सूची में एआईयूडीएफ विधायकों के नाम शामिल होने से पूरे असम में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, एआईयूडीएफ के जिन तीन विधायकों ने प्रमोद बोरों के पक्ष में हस्ताक्षर किए हैं, वे हैं – करीम उद्दीन बरभूइयां, निजाम उद्दीन चौधरी और जाकिर हुसैन लश्कर। इनमें सबसे अहम बात यह है कि करीम उद्दीन बरभूइयां ने प्रमोद बोरों को समर्थन देने के तुरंत बाद एआईयूडीएफ की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा भी दे दिया है। बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाली एआईयूडीएफ के विधायकों द्वारा इस तरह भाजपा गठबंधन के उम्मीदवार का खुलकर समर्थन करना कई सवाल खड़े कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि पार्टी नेतृत्व की पूर्व अनुमति के बिना किसी विधायक का इस तरह का कदम उठाना लगभग असंभव माना जाता था, इसलिए यह घटनाक्रम अंदरूनी राजनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव का संकेत देता है। विपक्षी खेमे में भी इस घटना को लेकर बेचैनी और असमंजस की स्थिति देखी जा रही है। गौरतलब है कि इससे पहले एआईयूडीएफ की ओर से बदरुद्दीन अजमल को विपक्ष के साझा उम्मीदवार के रूप में आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही थी। लेकिन अब उसी पार्टी के विधायक सरकारी पक्ष के उम्मीदवार के समर्थन में आ खड़े होने से असम की राजनीतिक गणित पूरी तरह बदलती दिख रही है। प्रमोद बोरों ने हाल ही में बीटीसी (बोड़ोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल) चुनाव में हाग्रामा मोहिलारी के हाथों हार का सामना किया था। इसके बावजूद, वे अभी भी राज्य में भाजपा के सबसे नज़दीकी सहयोगियों में गिने जाते हैं और अब राज्यसभा चुनाव में उनके नामांकन के साथ-साथ विपक्षी विधायकों का समर्थन, भविष्य की सत्ता-समीकरणों पर दूरगामी असर डाल सकता है।

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