बागपत

कौशल भवन में धर्मसभा: आत्मा की जागृति ही चातुर्मास का सार – आचार्य श्री 108 नयन सागर जी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

बागपत : आज कौशल भवन सभागार में आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री 108 नयन सागर मुनिराज ने चातुर्मास के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि —
“आत्मा की जागृति का नाम ही चातुर्मास है।”
उन्होंने कहा कि जैसे शरीर की नींद लंबी हो तो जागरण में देर होती है, वैसे ही आत्मा की नींद भी हमें परम लक्ष्य से दूर कर देती है।

आचार्य श्री ने ब्रह्म मुहूर्त में जागने की महत्ता बताते हुए कहा कि —

“जो ब्रह्म मुहूर्त में उठता है, वह स्वयं को और संसार को बेहतर समझ सकता है।”
उन्होंने कहा कि जीवन में यदि दुर्घटनाओं से बचना है, तो सावधानी आवश्यक है।
आलस्य जीवन में पापों को आमंत्रित करता है, इसलिए हमें आलस को त्यागकर जागरूक जीवन अपनाना चाहिए।

उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा —

“अच्छी बात कहो, अच्छी बात सुनो, और अच्छी बात ही करो। चाहे कोई कितनी भी बुराई करे, तुम केवल अच्छाई की राह पर चलो।”
उन्होंने स्पष्ट कहा कि —
“भगवान बनने से पहले इंसान बनना पड़ता है।”

इस अवसर पर आचार्य श्री ने घोषणा की कि 25 जुलाई से 9 अगस्त तक अतिथि भवन में 16 दिवसीय ‘शांति विधान’ का आयोजन किया जाएगा। जो श्रावक इस पुण्य कार्य में भाग लेना चाहते हैं, वे अपना नाम अतिथि भवन में पंजीकृत करवा सकते हैं।

धर्मसभा में प्रवीण जैन, मनोज जैन, आदेश जैन, संभव जैन, सबका दिनेश जैन, अनुराग मोहन जैन, राकेश जैन, सतीश जैन, अमित जैन, आनंद जैन, प्रवेश जैन सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।

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