गाजियाबाद
ठंड में बच्चों को स्कूल बुलाया, आदेश ठंडे बस्ते में , अधिकारियों के आदेश हवा हवाई
लोनी नगरपालिका व ग्रामीण इलाकों में भी आदेशों की अनदेखी
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी गाजियाबाद : कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बावजूद जनपद गाजियाबाद के कई निजी विद्यालयों में कक्षाएँ जारी हैं, जबकि जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा 01 जनवरी 2026 को जारी आदेश के अनुसार नर्सरी से कक्षा-12 तक सभी परिषदीय, राजकीय, सहायता प्राप्त, सीबीएसई, आईसीएसई व अन्य बोर्ड के स्कूलों को 04 जनवरी 2026 तक पूर्णतः बंद रखने के निर्देश दिए गए थे।
कागज़ों में सख़्त दिखने वाला यह आदेश ज़मीनी स्तर पर बेअसर साबित हो रहा है—लोनी नगरपालिका क्षेत्र से लेकर देहात के स्कूलों तक बच्चों को सुबह की भीषण ठंड में बुलाया जा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि यह सीधे-सीधे बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है, जबकि प्रशासनिक तंत्र मौन दिखाई दे रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि
जब आदेश जारी हो चुका है, तो उसका पालन सुनिश्चित क्यों नहीं कराया जा रहा?
क्या निर्देश सिर्फ़ फाइलों, नोटिस बोर्ड और व्हाट्सऐप ग्रुप तक ही सीमित रह गए हैं?
क्या बच्चों की सुरक्षा से ज़्यादा महत्वपूर्ण स्कूलों की फीस और औपचारिक उपस्थिति मानी जा रही है?
लोनी और ग्रामीण क्षेत्रों के कई अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि आदेश में मान्यता निरस्तीकरण और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी के बावजूद न निरीक्षण हो रहा है, न ही कोई दंडात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। इससे यह आदेश मज़ाक बनकर रह गया है और स्कूल संचालकों के हौसले और बढ़ गए हैं।
जनता का साफ़ सवाल है—
अगर आदेश लागू ही नहीं कराने, तो फिर उन्हें जारी करने का क्या अर्थ?
और यदि ठंड के बीच कोई अप्रिय घटना घटती है, तो उसकी ज़िम्मेदारी कौन उठाएगा?
बच्चों की सुरक्षा विकल्प नहीं, बल्कि प्रशासनिक दायित्व है। अब ज़रूरत है कि लोनी नगरपालिका से लेकर ग्रामीण अंचलों तक सख़्त निगरानी और वास्तविक कार्रवाई दिखाई दे—वरना यह आदेश भी बाकी आदेशों की तरह “हवा में जारी होकर हवा में ही खो” हो गये।


