फर्जी IAS सौरभ त्रिपाठी का पर्सनल असिस्टेंट गिरफ्तार,
लखनऊ पुलिस ने कसा ठगी के नेटवर्क पर शिकंजा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लखनऊ : लखनऊ की वजीरगंज पुलिस ने फर्जी IAS अधिकारी सौरभ त्रिपाठी के पर्सनल असिस्टेंट (PA) को गिरफ्तार कर एक बड़े ठगी रैकेट का पर्दाफाश किया है। यह PA न केवल सौरभ के फर्जी प्रोटोकॉल को मैनेज करता था, बल्कि उत्तर प्रदेश सहित दिल्ली, बिहार, उत्तराखंड, गोवा और अन्य राज्यों में फैले ठगी के मकड़जाल में भी अहम भूमिका निभा रहा था।
सौरभ त्रिपाठी, जो खुद को भारत सरकार का संयुक्त सचिव और IAS अधिकारी बताता था, को 3 सितंबर को वजीरगंज पुलिस ने कारगिल शहीद पार्क के पास वाहन चेकिंग के दौरान गिरफ्तार किया था। उसके काफिले में डिफेंडर, मर्सिडीज, फॉर्च्यूनर और इनोवा जैसी लग्जरी गाड़ियां थीं, जिन पर लाल-नीली बत्तियां और फर्जी सचिवालय पास लगे थे। सौरभ ने फर्जी NIC और GOV ईमेल ID का इस्तेमाल कर सरकारी अधिकारियों और कारोबारियों को ठगा था।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि सौरभ का PA उसका दाहिना हाथ था। वह सौरभ के लिए निम्नलिखित गतिविधियों को अंजाम देता था:प्रोटोकॉल की व्यवस्था: सौरभ के किसी जिले में जाने से पहले, PA स्थानीय अधिकारियों से संपर्क कर लाल-नीली बत्तियों और VIP प्रोटोकॉल की व्यवस्था करता था।लग्जरी गाड़ियों का इंतजाम: PA किराए पर महंगी गाड़ियां लाता था, जिन्हें फर्जी सरकारी पास और बत्तियों से सजाया जाता था ताकि सौरभ को VVIP का दर्जा मिले।ठगी में सहयोग: PA सौरभ की फर्जी पहचान को विश्वसनीय बनाने के लिए सोशल मीडिया अकाउंट्स (@Saurabh_IAAS) और फर्जी दस्तावेजों का प्रबंधन करता था। वह पीड़ितों के सामने सौरभ का रौब बढ़ाने में भी शामिल था।विस्तृत नेटवर्क: दिल्ली, बिहार, उत्तराखंड, गोवा और मध्य प्रदेश में ठगी के लिए सौरभ और PA ने मिलकर एक व्यापक नेटवर्क स्थापित किया था। वजीरगंज पुलिस ने PA को उस समय गिरफ्तार किया जब वह लखनऊ से फरार होने की कोशिश कर रहा था। पुलिस ने उसके पास से फर्जी दस्तावेज, मोबाइल और अन्य सबूत बरामद किए हैं। डीसीपी क्राइम कमलेश त्रिपाठी ने बताया कि साइबर सेल सौरभ और PA के फर्जी ईमेल, सोशल मीडिया अकाउंट्स और बैंक ट्रांजैक्शंस की जांच कर रही है। पुलिस को शक है कि इस रैकेट में और लोग भी शामिल हो सकते हैं। मऊ जिले के सराय लखंसी का रहने वाला सौरभ त्रिपाठी कंप्यूटर साइंस में B.Tech है। उसने दो बार UPSC की परीक्षा दी, लेकिन असफल रहा। इसके बाद उसने फर्जी IAS बनकर ठगी शुरू की। वह लखनऊ के शालीमार वन वर्ल्ड अपार्टमेंट में 60 हजार रुपये मासिक किराए पर रहता था और दो गनर रखे थे। सौरभ और PA नौकरी, ट्रांसफर और ठेके दिलाने के नाम पर लोगों से पैसे और गिफ्ट्स ऐंठते थे। यह मामला सरकारी तंत्र में सेंधमारी और सुरक्षा चूक का गंभीर उदाहरण है। लखनऊ पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और पीड़ितों की पहचान करने में जुटी है। यह घटना प्रशासन के लिए चेतावनी है कि फर्जी दस्तावेजों और प्रोटोकॉल के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।




