गोड्डा

शिक्षक राजेन्द्र बाबू ने बसंतराय क्षेत्र में जगाया शिक्षा का अलख

-- सुशिक्षित समाज के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अहम

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा : आजादी के बाद जिले के सुदूरवर्ती गांवों में शिक्षा का उचित माहौल बनाने सहित सुशिक्षित समाज के निर्माण में तत्कालीन शिक्षकों की भूमिका अहम है। एकीकृत बिहार के सुदूरवर्ती सीमांत क्षेत्र बसंतराय- महेशपुर इलाके में शिक्षा की मशाल जलाने के लिए शिक्षकों ने ईमानदार पहल की है। इसे भुलाया नहीं जा सकता है। जिले के प्रख्यात शिक्षक राजेन्द्र नारायण सिंह का नाम श्रद्धापूर्वक लिया जाता है। बिहार-झारखंड के सीमांत क्षेत्र शाकुंड बेलडीहा से आकर शिक्षा का अलख जगाया। यह उनके समर्पण की भावना को दर्शाता है। उनके साथ महेन्द्र मिश्र सेवा निवृत्त शिक्षक भी कदमताल करते हुए क्षेत्र में शिक्षा का उचित माहौल बनाया। महेशपुर के त्रिवणी स्मारक उवि के तत्कालीन प्राचार्य केदार झा की अगुवाई में विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था परवान पर रही। संतालपरगना के छात्र यहां शिक्षा प्राप्त करने के लीीिए लालायित रहते थे। सेवा निवृत्त कर्मी सुनील कुमार झा ने कहा कि राजेन्द्र नारायण सिंह हिंदी साहित्य के अमूल्य धरोहर थे। राष्टकवि दिनकर, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, हरिबंश राय बच्चन, महादेवी वर्मा की रचनाओं पर उन्होंने शोध भी किया। आजादी के बाद संतालपरगना स्तरीय उच्च विद्यालय महेशपुर में साहित्यकार व कवि शुद्ध्देव झा उत्पल की प्रेरणा से बतौर हिंदी शिक्षक पदस्थापित हुए। उन्होंने आजादी के दौर के उपरांत अपनी लेखनी व लेखकों की ओजस्वी आलेखों से आम लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने हिंदी साहित्य के प्रचार- प्रसाद की दिशा में अनेक कार्य किये। उनकी पांडूलिपी आज भी संग्रहित हैं। उनकी प्रेरणा से उनके पुत्र डा. शिशिर कुमार उनकी ख्याति को बढ़ाने में सराहनीय योगदान दे रहे हैं। सेवा निवृत्त शिक्षक दिलीप कुमार झा ने कहा कि उनके पढ़ाये शिष्य आज बड़े-बड़े आफिसर बनकर सेवा निवृत्त हो चुके हैं। शिक्षकों को उनसे प्रेरणा देने की जरुरत है।
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