गाजियाबाद

यज्ञ, शपथ और सवाल

दिल्ली, लोनी सहारनपुर मार्ग का निर्माण या सियासी रहस्य? लोनी में चर्चाओं का बाजार गर्म

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : लोनी में इन दिनों दिल्ली, लोनी सहारनपुर मार्ग का पुनर्निर्माण जितना चर्चा में है, उससे कहीं ज्यादा चर्चा उससे जुड़ी सियासी और धार्मिक गतिविधियों की हो रही है। एक ओर भाजपा नेताओं द्वारा विधि-विधान से यज्ञ और पूजा-अर्चना कर निर्माण कार्य बिना किसी विध्न-बाधा के पूरा होने की कामना की गई, तो दूसरी ओर स्थानीय विधायक ने ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों को सार्वजनिक मंच से कमीशन न लेने की शपथ दिला दी। इन दोनों घटनाओं ने इलाके में सवालों और अटकलों का दौर तेज कर दिया है।
लोग चुटकी लेते हुए कह रहे हैं कि सड़क बन रही है या कोई ‘महायुद्ध’ होने वाला है, जिसके लिए पहले शपथ और फिर कार्य निर्विघ्न पूरा होने के लिए यज्ञ की जरूरत पड़ गई। आखिर ऐसा कौन सा विघ्न है, जिससे बचने के लिए पूजा-पाठ करना पड़ रहा है? और अगर भाजपा सरकार में सब कुछ पारदर्शी है, तो फिर मंच से कमीशन न लेने की कसम क्यों?
भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. प्रमेन्द्र जांगड़ा और सभासद अंकुश जैन ‘मिकू’ ने भगवान विश्वकर्मा मंदिर जौहरी पुर में समर्थकों के साथ यज्ञ कर निर्माण कार्य सुचारु रूप से पूरा होने की प्रार्थना की। वहीं विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने ठेकेदारों और अधिकारियों को साफ-साफ चेतावनी देते हुए कमीशनखोरी से दूर रहने की शपथ दिलाई।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या वाकई इस मार्ग के निर्माण में कोई अदृश्य अड़चन है? या फिर पहले के अनुभवों ने जनप्रतिनिधियों को इतना सतर्क बना दिया है कि उन्हें धार्मिक अनुष्ठान और सार्वजनिक शपथ का सहारा लेना पड़ रहा है?
स्थानीय चौराहों, चाय की दुकानों और बाजारों में लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। कोई इसे आस्था बता रहा है, तो कोई व्यवस्था पर अविश्वास। कई लोगों का कहना है कि अगर सब कुछ ठीक है, तो इतनी ‘सुरक्षा कवच’ की जरूरत क्यों पड़ी?
हालांकि, आम जनता की चिंता सीधी और साफ है — सड़क अच्छी बने, समय पर बने और भ्रष्टाचार से दूर बने। क्योंकि वर्षों से जलभराव, गड्ढों और जाम ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है।
फिलहाल, लोनी में यह सड़क सिर्फ विकास का प्रोजेक्ट नहीं रही, बल्कि ‘यज्ञ, शपथ और सवालों’ का संगम बन गई है। अब देखना यह है कि करोड़ों की लागत से बनने वाला यह मार्ग सच में बिना विध्न के पूरा होता है या चर्चाओं का यह सिलसिला आगे भी चलता रहता है।
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