दिल से जीता, हौसले से चमका… राहुल बना प्रजापति समाज का हीरा
हृदय प्रत्यारोपण के बाद भी पदक जीतकर बढ़ाया बागपत और समाज का मान

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बागपत। कहते हैं कि जब हालात इंसान की राह में पहाड़ बनकर खड़े हो जाएँ, तब हौसला ही सबसे बड़ा सहारा बनता है। बागपत जिले के गांव धनौरा सिल्वर नगर के लाल राहुल प्रजापति ने यह साबित कर दिखाया कि जिंदगी कितनी भी कठिन क्यों न हो, जज्बा और संघर्ष हमेशा जीतते हैं।
राहुल की जीवन कहानी किसी प्रेरक गाथा से कम नहीं। एक समय ऐसा आया जब उनका दिल काम करना बंद कर चुका था, सांसें थमने लगी थीं और परिवार गहरे अंधेरे में डूब गया था। लेकिन किस्मत ने उन्हें नया दिल दिया और राहुल ने उस दिल की हर धड़कन को देश, समाज और पूरे प्रजापति समाज के नाम कर दिया।
मौत से लड़कर जीता नया जीवन
दिसंबर 2017… यह दिन राहुल और उनके परिजनों की जिंदगी में सबसे कठिन था। दिल्ली के एस्कॉर्ट्स अस्पताल में डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि अब हृदय प्रत्यारोपण ही आखिरी रास्ता है। परिवार की आंखों के सामने मानो सबकुछ बिखर गया। लेकिन भगवान ने सुन ली।
18 फरवरी 2018 को राहुल का सफल प्रत्यारोपण हुआ। नया दिल धड़कने लगा और उसी दिन राहुल ने तय कर लिया – “अब यह जीवन सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि देश और समाज का होगा।”
संघर्ष से सोना गढ़ा
ऑपरेशन के बाद लंबा इलाज, परहेज़ और दर्दनाक समय भी राहुल का हौसला तोड़ नहीं पाया। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को संभाला और खेल के मैदान में लौट आए।
- 2022 में मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण खेलों में डिस्कस थ्रो और बैडमिंटन में पदक जीते।
- 2023 में ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में हुए विश्व अंग प्रत्यारोपण खेलों में तिरंगा लहराया।
- अब 2024 में बेंगलुरु और 2025 में जर्मनी में होने वाले खेलों में भाग लेने की तैयारी कर रहे हैं।
“दिल तो नया है, लेकिन हौसला मेरा पुराना”
राहुल मुस्कराते हुए कहते हैं –
“जब मेरा दिल साथ छोड़ गया तो भगवान ने मुझे दूसरा दिल दिया। यह दिल सिर्फ धड़कनों तक सीमित नहीं रहेगा। यह देश के लिए धड़केगा और उन लोगों के लिए जियेगा जिन्होंने मुझे जिंदगी दी।”
वे अंगदान को सबसे बड़ा दान मानते हैं और युवाओं से अपील करते हैं कि अंगदान के लिए आगे आएं, ताकि और भी जिंदगियां बच सकें।
समाज का संबल और सम्मान
राहुल की इस उपलब्धि पर पूरे प्रजापति समाज में खुशी की लहर है।
श्री दक्ष प्रजापति सेवा समिति बागपत के अध्यक्ष सुरेंद्र मलानिया तथा समाज के अन्य लोगों ने राहुल को सम्मानित किया और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
सुरेंद्र मलानिया ने कहा कि “राहुल प्रजापति समाज का गौरव हैं। आगे बढ़ने की राह में यदि कोई भी बाधा आई तो पूरा समाज और मैं व्यक्तिगत रूप से राहुल के साथ खड़ा रहूँगा।”
होटल की रसोई से लेकर खेल मैदान तक
राहुल सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि एक बेहतरीन शेफ भी हैं। दिल्ली, गुरुग्राम और अन्य शहरों के कई प्रतिष्ठित होटलों में उन्होंने अपनी मेहनत और हुनर से पहचान बनाई है। इस समय वे गुरुग्राम के प्राइड होटल में कार्यरत हैं और साथ ही खेलों की तैयारी भी जारी रखे हुए हैं।
समाज का गौरव
धनौरा सिल्वर नगर का यह बेटा आज पूरे बागपत जिले का ही नहीं, बल्कि पूरे प्रजापति समाज का गौरव है। बुजुर्गों का कहना है कि राहुल ने संघर्ष करके दिखा दिया कि प्रजापति समाज का हर बेटा मेहनत और साहस से दुनिया में अपनी पहचान बना सकता है।
राहुल की कहानी हर उस इंसान और खासकर हर उस युवा प्रजापति के लिए प्रेरणा है, जो जीवन की कठिन राहों में हार मान लेता है। उन्होंने दिखा दिया कि दिल बदला जा सकता है, लेकिन हौसला नहीं।




