सिंगरौली

सवर्णों के खिलाफ जहर उगलने वाले ‘विनोद शाह’ पर चौतरफा घेराबंदी

सवर्ण आर्मी ने की FIR की उग्र मांग, कोतवाली बैढ़न में सौंपा शिकायती आवेदन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। सोशल मीडिया के माध्यम से जातीय विद्वेष फैलाने और सवर्ण समाज के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने का गंभीर मामला सिंगरौली जिले से सामने आया है। ‘विनोद शाह समाजसेवी’ नामक फेसबुक आईडी से लगातार भड़काऊ और आपत्तिजनक पोस्ट किए जाने को लेकर सवर्ण आर्मी (सवर्ण सेवा न्यास) ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कोतवाली बैढ़न में लिखित शिकायत सौंपी है और आरोपी के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज करने की मांग की है।
संगठन का आरोप है कि विनोद शाह द्वारा सोशल मीडिया पर जानबूझकर ऐसी सामग्री प्रसारित की जा रही है, जिससे समाज में जातीय तनाव, घृणा और हिंसा को बढ़ावा मिल सकता है।
विवादित पोस्ट में क्या है आरोप?
शिकायत में कहा गया है कि आरोपी द्वारा सवर्ण समाज के लिए अत्यंत आपत्तिजनक और अशोभनीय शब्दों का प्रयोग किया गया है। पोस्ट में—
सवर्ण समाज को अपमानजनक उपनामों से संबोधित किया गया।
संवैधानिक व्यवस्थाओं और सामाजिक ढांचे पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं।
ब्राह्मण समाज की उत्पत्ति को लेकर भ्रामक और अपमानजनक बातें लिखी गईं।
UGC को लेकर 2026 में प्रतिबंध जैसी झूठी अफवाहें फैलाकर छात्रों को गुमराह किया गया।
संगठन का कहना है कि यह सब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं बल्कि सुनियोजित रूप से सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश है।
सवर्ण आर्मी का कड़ा रुख
सवर्ण आर्मी के पदाधिकारियों सर्वेश पाण्डेय, ठाकुर शिवम सिंह, पं. विकास दुबे और अमित शर्मा ने संयुक्त बयान में कहा—
“विनोद शाह समाजसेवा के नाम पर नफरत फैला रहा है। यह सीधा-सीधा जातीय हिंसा भड़काने का प्रयास है। यदि पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की धाराओं में कार्रवाई नहीं की, तो समाज सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।”
स्क्रीनशॉट सौंपे, साइबर जांच की मांग
शिकायत के साथ पुलिस को सोशल मीडिया पोस्ट के दर्जनों स्क्रीनशॉट सौंपे गए हैं। इनमें आरोपी के साथ-साथ उसके समर्थकों द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणियां भी शामिल हैं। संगठन ने मामले की साइबर फॉरेंसिक जांच कराए जाने की भी मांग की है।
कोतवाली बैढ़न पुलिस ने दिनांक 02 फरवरी 2026 को आवेदन प्राप्त कर लिया है और प्रारंभिक जांच की बात कही है।
पहले भी विवादों में रहा है नाम
संगठन का यह भी आरोप है कि विनोद शाह पूर्व में मध्य प्रदेश के एक वरिष्ठ संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ भी सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणी कर चुका है। उस समय भी शिकायत दी गई थी, लेकिन कार्रवाई न होने से आरोपी के हौसले और बढ़ गए।
बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि— क्या पुलिस इस बार डिजिटल सबूतों के आधार पर सख्त कार्रवाई करेगी?
या फिर सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वालों को एक बार फिर खुली छूट मिल जाएगी?
चेतावनी
सवर्ण आर्मी ने साफ कहा है कि यदि समय रहते कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला प्रदेश स्तर पर आंदोलन का रूप ले सकता है।
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर बढ़ती जातीय नफरत और कानून की गंभीर परीक्षा बन चुका है।
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