बाराबंकी

छेड़छाड़ के बाद मां की पिटाई, फिर पुलिसिया दबाव

एसपी से शिकायत पर मिला कार्रवाई का भरोसा, लेकिन सिस्टम पर सवाल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 

नाबालिग से अभद्रता, विरोध पर हमला—रात 1 बजे बयान, FIR का आश्वासन, फिर भी स्थानीय पुलिस की कार्यशैली कटघरे में
बाराबंकी। महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर चलाए जा रहे मिशन शक्ति अभियान की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नगर कोतवाली क्षेत्र की सिटी चौकी अंतर्गत नई बस्ती नबीगंज में हुई घटना ने न सिर्फ कानून व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर आरोप लगा दिए हैं।पीड़िता सोफिया के मुताबिक, उनकी 16 वर्षीय बेटी के साथ मोहल्ले के ही कुछ युवकों ने उस समय छेड़छाड़ की, जब वह शाम को घर लौट रही थी। आरोप है कि आरोपियों ने रास्ता रोककर जबरन पकड़ने और अभद्रता करने की कोशिश की। किसी तरह बचकर घर पहुंची बेटी ने जब आपबीती सुनाई, तो मां न्याय की उम्मीद लेकर आरोपियों के घर पहुंची।लेकिन यहां कहानी ने खौफनाक मोड़ ले लिया—आरोप है कि आरोपियों के परिजनों ने ही महिला को बेरहमी से पीट दिया। मारपीट इतनी गंभीर थी कि महिला को कई जगह टांके लगाने पड़े।मामले की शिकायत नगर कोतवाली में दी गई, लेकिन 48 घंटे बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यही नहीं, पीड़िता का आरोप है कि अब पुलिस कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही दबाव में लेकर समझौता कराने की कोशिश कर रही है।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पीड़िता के घर रात करीब 1 बजे पुलिस बयान लेने पहुंची। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ परिवार को भयभीत किया, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या यह प्रक्रिया का हिस्सा है या दबाव बनाने की रणनीति?पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपियों को एक स्थानीय दबंग का संरक्षण प्राप्त है, जो हाल ही में जमानत पर जेल से बाहर आया है। इसी कारण पूरे मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हो पा रही है।इसी बीच, पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक के समक्ष पेश होकर अपनी पूरी आपबीती बताई, जहां से उन्हें स्पष्ट तौर पर प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कार्रवाई का आश्वासन मिला। इससे एक ओर जहां न्याय की उम्मीद जगी है, वहीं यह भी सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर स्थानीय स्तर पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।वहीं, जब इस मामले में क्षेत्राधिकारी (सीओ सिटी) से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और पीड़िता के सभी आरोप सही नहीं हैं। हालांकि, रात में बयान लेने के सवाल पर उन्होंने अनभिज्ञता जताई।
यह घटना केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि उस सिस्टम का आईना है, जहां न्याय मांगने वाला ही दबाव में नजर आता है। छेड़छाड़ जैसे गंभीर मामलों में भी अगर तत्काल कार्रवाई नहीं होती, तो यह न सिर्फ कानून व्यवस्था बल्कि मिशन शक्ति जैसे अभियानों की विश्वसनीयता पर भी सीधा प्रहार है।अब देखना यह होगा कि क्या पुलिस अधीक्षक का आश्वासन जमीनी हकीकत में बदलता है, या फिर यह मामला भी प्रभाव और दबाव के चलते फाइलों में ही सिमट कर रह जाएगा।
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