सिंगरौली

नगर निगम सिंगरौली में विकास कार्यों के नाम पर अव्यवस्था और बदइंतजामी पूरे चरम पर !

वार्ड 41 में गैस पाइपलाइन से आमजन परेशान, महापौर रानी अग्रवाल ने दिए सख्त निर्देश

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। जिले के नगर पालिक निगम सिंगरौली क्षेत्र में विकास कार्यों के नाम पर अव्यवस्था और बदइंतजामी पूरे चरम पर है। बरसात के मौसम में जहां एक ओर सिवरेज कार्यों को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर वार्ड क्रमांक 41 में गैस पाइपलाइन बिछाने का कार्य तेज़ी से जारी है। इस पाइपलाइन बिछाने के चलते पूरे क्षेत्र में जगह-जगह गहरे गड्ढे खोदे गए हैं, जो आम नागरिकों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। आए दिन इन गड्ढों की वजह से हादसे हो रहे हैं और स्थानीय लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई बार गड्ढों में बाइक व पैदल चलने वाले लोग गिरकर घायल हो चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार बेखबर हैं। गड्ढे बिना किसी बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड के खुले छोड़ दिए गए हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है। इस पूरे मसले पर जब नगर निगम महापौर रानी अग्रवाल से सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट तौर पर बताया कि बरसात को देखते हुए आगामी तीन महीनों के लिए नगर निगम द्वारा सभी प्रकार के सिविल निर्माण कार्यों पर रोक लगाई गई है, जिसमें सिवरेज और गैस पाइपलाइन का काम भी शामिल है। उन्होंने कहा कि “विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन आम जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। महापौर रानी अग्रवाल ने यह भी कही कि जिन स्थानों पर पहले से गड्ढे खोदे गए हैं, वहां नियमित रूप से मरम्मत और बंद करने का कार्य किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके। यदि कोई ठेकेदार लापरवाही बरतता है और तय निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वार्ड 41 के नागरिकों में नगर निगम की इस कार्यप्रणाली को लेकर भारी नाराजगी है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन और ठेकेदारों की मिलीभगत से सिर्फ कागजों में कार्य पूरा होता है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही होती है। गड्ढों की वजह से कई बार स्कूली बच्चों को चोट लग चुकी है, बुज़ुर्गों को आने-जाने में कठिनाई हो रही है और सड़कें किचड़ में तब्दील हो चुकी हैं। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि जब सिवरेज का कार्य बरसात में बंद किया जा सकता है, तो गैस पाइपलाइन का काम क्यों चालू रखा गया? क्या ठेकेदारों को नियमों से ऊपर रखा गया है? और यदि कार्य चालू है, तो सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा?
नगर निगम प्रशासन को चाहिए कि वह पारदर्शिता के साथ कार्यों की मॉनिटरिंग करे और जहां लापरवाही हो रही है, वहां त्वरित कार्रवाई कर जनता का विश्वास बहाल करे। क्योंकि विकास की कीमत आम जनता की जान और सुविधाओं से नहीं चुकाई जा सकती।
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