विधि,विधान से करें पूजन, होगी मनोकामना पूर्ण, स्वामी प्रणव दास

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
अमेठी । शारदीय नवरात्र के पंचम दिवस शुक्रवार को स्वामी प्रणव दास महाराज ने बताया कि स्कंदमाता की कथा हमे सीख देती है कि मातृत्व सिर्फ जन्म देना नहीं बल्कि सन्तान को उत्तम राह दिखाना भी है। जनपद के अमेठी तहसील के अंतर्गत आदर्श बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय राजेंद्रपुरम अगहर में नवचंडी महायज्ञ का अनुष्ठान किया जा रहा है। स्वामी प्रणव दास महाराज ने कथा का वर्णन करते हुए कहा कि एक समय तारकासुर नामक राक्षस ने ब्रह्मा से वरदान मांगा कि उसकी मृत्यु केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही हो, यह सोचकर कि शिव कभी विवाह नहीं करेंगे और उनका कोई पुत्र नहीं होगा। इस पर ब्रह्मा ने उसे शिव के पुत्र द्वारा वध का वरदान दिया। तारकासुर के अत्याचारों से त्रस्त होकर देवताओं ने शिव से प्रार्थना की। शिव और पार्वती के विवाह से कार्तिकेय (स्कंद) का जन्म हुआ।जिन्होंने तारकासुर का वध किया।
तारकासुर के वध के लिए मां पार्वती ने स्कंदमाता के रूप में कार्तिकेय को युद्ध की शिक्षा प्रदान की थी। भारतीय पुराणों और शास्त्रों में कामना के अनुसार यज्ञ का वर्णन किया गया है परन्तु कलियुग के प्रभाव से धीरे धीरे यज्ञ विधाएं लुप्त होने के कगार पर है। आदिकाल में कामना के अनुसार विधि विधान से यज्ञ का आयोजन किया जाता था और उससे लाभ भी होता था । नवरात्र के पंचम दिवस यज्ञ के उपरांत स्वामी प्रणव दास महाराज ,वसुधारा सनकादिक आश्रम बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड ने कहा कि समाज को पुनः पौराणिक विधाओं पर चलना चाहिए और विधि विधान से यज्ञ करना चाहिए,जिससे यज्ञ नारायण भगवान सब का मनोरथ पूर्ण करेंगे। भारत जैसा और कोई देश नहीं है,जिसके पदचिह्नों पर आज पूरा विश्व चल रहा है।

