गाजियाबाद
राष्ट्रीय राजमार्ग के जाम में फंसीं एम्बूलैंस
फोटो खिंचवाकर हाज़िरी पूरी करते अफसर और बदबूदार सडे जलभराव में उतरते नेता

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी, गाजियाबाद: राष्ट्रीय राजमार्ग 709 पर शुक्रवार को प्रशासनिक लापरवाही और जल निकासी व्यवस्था की बदहाल स्थिति ने शहर की रफ्तार को थाम दिया। नालों के ओवरफ्लो होने से सड़क पर सड़ा-गला, बदबूदार पानी फैल गया, जिससे पूरा मार्ग नदी में तब्दील हो गया। हालात इतने खराब रहे कि जवाहर नगर से लेकर परमहंस बिहार गेट तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात घंटों ठप रहा।
देखते ही देखते सैकड़ों वाहन जाम में फंस गए। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग घंटों परेशान रहे। दोपहिया वाहन बंद पड़ गए, जबकि चारपहिया वाहन पानी में रेंगते रहे। इस दौरान लाखों रुपये का डीज़ल और पेट्रोल व्यर्थ जल गया, लेकिन न तो पुलिस और न ही ट्रैफिक विभाग का कोई कर्मचारी मौके पर दिखाई दिया। नाराज़ लोगों ने सरकार और प्रशासन की लापरवाही पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
एम्बुलेंस भी फंसी, मरीज की बिगड़ी हालत
इसी दौरान एक एम्बुलेंस, जिसमें गंभीर मरीज को अस्पताल ले जाया जा रहा था, घंटों तक सायरन बजाती रही। चारों तरफ से जाम इतना घना था कि उसे आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं मिला। चालक और स्टाफ ने बार-बार निकलने की कोशिश की, लेकिन नतीजा सिफर रहा। समय बीतने के साथ मरीज की तबीयत और खराब होती चली गई। लोगों ने सवाल उठाया कि जब आम जनता और एम्बुलेंस तक फंसी रह जाएं, तो प्रशासन आखिर है कहाँ?
नेता उतरे मैदान में, गंदे पानी में धक्का लगाकर निकाले वाहन
जाम में फंसे लोगों की बेबसी देखकर भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. प्रमेन्द्र जांगड़ा और नगर पालिका वार्ड 41 के सभासद अंकुश जैन मिकू खुद मैदान में उतर आए। दोनों जनप्रतिनिधियों ने बिना झिझक सड़े-गले, बदबूदार पानी में उतरकर बंद पड़े वाहनों को धक्का लगाया और कई वाहनों को रास्ते से हटवाया।
उनके इस प्रयास से कुछ ही देर में रुका हुआ यातायात आंशिक रूप से चालू हो गया। यह नज़ारा देखकर आसपास खड़े लोगों ने तालियां बजाईं और कहा — “नेता वही, जो सिर्फ मंच पर नहीं, मैदान में भी साथ दे।”
अफसर पहुंचे, फोटो खिंचवाकर लौटे
इस बीच, नगरपालिका परिषद के चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर संजय कुमार अवाना भी अपनी टीम के साथ शिव बिहार मेट्रो स्टेशन पहुंचे। वहां सड़क पूरी तरह पानी में डूबी हुई थी और हालात किसी नदी जैसे थे। उन्होंने कर्मचारियों को शांति नगर क्षेत्र में सीवर सफाई के निर्देश दिए, कुछ तस्वीरें खिंचवाईं और थोड़ी देर बाद रवाना हो गए।
हालांकि, स्थानीय लोगों ने कहा कि अधिकारियों की मौजूदगी सिर्फ औपचारिकता भर रही। सफाई कार्य का कोई ठोस असर नहीं दिखा और जलभराव जस का तस बना रहा।
लोगों का तंज़ था —
> अफसर तस्वीरों में मुस्कराते हैं, लेकिन जनता की परेशानी यथावत रहती है
राष्ट्रीय राजमार्ग 709 पर यह दृश्य एक बार फिर प्रशासनिक उदासीनता और कागज़ी तैयारियों की पोल खोलता है। जनता अब उम्मीद कर रही है कि अगली बारिश से पहले जिम्मेदार अधिकारी ज़मीन पर उतरें — वरना सड़कें फिर से “राजमार्ग” नहीं, “जलमार्ग” बन जाएंगी



