असम तथा असमिया के दिल की धड़कन ,
लोकप्रिय गायक जुबिन गर्ग की अंतिम यात्रा ने बनाया विश्व रिकॉर्ड।

असम : असम तथा असमिया के दिल की धड़कन, नयनों का मोती, 18 नवम्बर 1972 को जन्मे लोकप्रिय गायक और संगीतकार जुबिन गर्ग का 19 सितम्बर 2025 को 53 वर्ष की आयु में सिंगापुर में तैरने के दौरान हुई एक दुर्घटना में दुखद निधन हो गया। सिंगापुर सरकार द्वारा जारी मृत्यु प्रमाणपत्र के अनुसार उनकी मौत का कारण “ड्राउनिंग” (पानी में डूबना) बताया गया है। जुबिन गर्ग उस समय सिंगापुर में आयोजित होने वाले एक कॉन्सर्ट ‘नॉर्थ ईस्ट फेस्टिवल’ में भाग लेने गए हुए थे। इसी बीच यह दुखद समाचार आने के बाद समूचा पूर्वोत्तर और पूरा असम स्तब्ध हो गया। उनके निधन पर असम के गांव-गांव, कस्बों और शहरों में शोक व्यक्त किया गया। सड़कों पर शोकयात्राएँ और सभाएँ आयोजित हुईं। प्रिय कलाकार के निधन की खबर सुनकर लोगों ने उस दिन अपने व्यवसाय और कामकाज बंद रखे। रविवार को सिंगापुर से उनका पार्थिव शरीर गुवाहाटी लाया गया। उनकी पत्नी गरिमा शैकिया गर्ग, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व शर्मा समेत अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने वहां उनकों श्रद्धांजलि अर्पित की। गुवाहाटी पहुंचने के बाद सबसे पहले उनके पार्थिव शरीर को उनके निवास पर ले जाया गया, इसके बाद आम जनता के अंतिम दर्शन के लिए गुवाहाटी के सरुसजाई स्टेडियम के अर्जुन भोगेश्वर बरुआ खेल परिसर में रखा गया। जुबिन गर्ग की अंतिम यात्रा के दिन गुवाहाटी की सड़कें लाखों प्रशंसकों से भर गईं। उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए 10 लाख से अधिक लोग एकत्रित हुए। इतनी बड़ी जनसभा के कारण उनकी अंतिम यात्रा को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अंतिम यात्रा की मान्यता मिली। इसे Limca Book of Records में शामिल किया गया है। इस सूची में प्रथम स्थान पर माइकल जैक्सन, दूसरे पर पोप फ्रांसिस और तीसरे पर रानी एलिजाबेथ का अंतिम संस्कार है। असम सरकार ने इस महान कलाकार के निधन पर तीन दिनों का राजकीय शोक घोषित किया और सभी सरकारी कार्य स्थगित कर दिए। महान संगीतकार का अंतिम संस्कार 23 सितम्बर को सोनापुर के कमारकुची गांव में पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। सरकार तथा विभिन्न दल-संगठनों ने घोषणा की है कि परिवार की इच्छा के अनुसार अंतिम संस्कार के बाद स्मारक स्थल का निर्माण किया जाएगा। गुवाहाटी के अलावा जोरहाट शहर में भी एक स्मारक स्थल निर्मित करने की बात सामने आई है। संगीत सम्राट जुबिन गर्ग ने अपने संगीतमय जीवन में असमिया, हिन्दी, बंगाली, भोजपुरी समेत 40 से अधिक भाषाओं और उपभाषाओं में 38,000 से अधिक गीतों को अपनी आवाज दी। 1992 में असमिया एल्बम अनामिका से लोकप्रिय हुए जुबिन गर्ग केवल असम ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वोत्तर और देशभर में सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में स्थापित हुए। असमिया संगीत जगत के इस महानायक की अंतिम यात्रा हमेशा सभी असमवासियों के दिलों में अमर रहेगी। उनके निधन से न केवल असम बल्कि संपूर्ण भारतीय संगीत जगत को अपूरणीय क्षति हुआ है।



