गाजियाबाद
अंकुर बिहार थाना फिर विवादों में – जनता परेशान, अपराधी बेखौफ

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गाजियाबाद: अंकुर बिहार थाना एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन वजह कानून-व्यवस्था सुधार नहीं बल्कि शिकायतें दर्ज न करने का आरोप है। थाना क्षेत्र में पीड़ित भटक रहे हैं और बदमाशों के हौसले लगातार बढ़ते दिख रहे हैं।
मिलक गांव निवासी कपिल पुत्र जयपाल कसाना ने पुलिस आयुक्त गाजियाबाद को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया कि थाना प्रभारी शिकायत दर्ज करने में जानबूझकर टालमटोल कर रहे हैं। कपिल के अनुसार 19/11/25 को चमन बिहार कॉलोनी स्थित प्लॉट पर विनीत पुत्र जयकरण और उसकी मां ब्रहमदेवी सहित तीन अन्य लोगों ने वहां पहुंचकर उसका गिरेबान पकड़ा और पिस्टल तानकर जान से मारने की धमकी दी। मामले का वीडियो भी पुलिस को सौंपा जा चुका है, साथ ही 112 पर कॉल और थाना प्रभारी को लिखित शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं की गई।
कपिल का आरोप है कि आरोपी उसके घर तक पहुंच गए और वहां भी पिस्टल दिखाकर धमकाया। उनका कहना है कि यह जमीनी विवाद का मामला था, जिसका फैसला भी हो चुका है, बावजूद इसके थाना प्रशासन मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा।
इसी तरह डीएलएफ निवासी तनु पुत्री मुकेश कुमार अपनी बाइक DL 14 TA 4791 चोरी होने की एफआईआर दर्ज कराने के लिए पिछले कई दिनों से थाने के चक्कर काट रही हैं, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। थक-हारकर तनु ने भी पुलिस आयुक्त को प्रार्थना पत्र सौंपा है।
इस प्रकार का यह पहला मामला नहीं है — इससे पहले ललित त्यागी की वर्कशॉप में लगातार तीन बार चोरी होने के बाद भी रिपोर्ट दर्ज न होने पर बड़ी फजीहत के बाद FIR लिखी गई थी।
वहीं, भाजपा सभासद रामनिवास त्रिपाठी भी समाधान दिवस के दौरान थाना प्रभारी के खिलाफ आधिकारिक रूप से शिकायत दर्ज करा चुके हैं। उनका कहना है कि थाना प्रशासन जानबूझकर मामलों को दबा रहा है।
सवाल खड़ा: FIR नहीं तो थाना किसलिए?
स्थानीय लोगों में रोष है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि जब घटनाएं दर्ज ही नहीं होंगी तो कागजों में अपराध कम जरूर दिखेगा, लेकिन जमीन पर अपराधियों के हौसले चरम पर रहेंगे।
स्थानीय लोग अब सवाल उठा रहे हैं —
जब पीड़ितों को रिपोर्ट लिखाने के लिए अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ें, तो स्थानीय थाना किस काम का?
क्या पुलिस वास्तव में अपराध को रोक रही है या आंकड़ों में छुपा रही है?
अंकुर बिहार थाना क्षेत्र में लगातार बढ़ती शिकायतों ने पुलिस कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना है कि पुलिस प्रशासन जागता है या फिर शिकायतें फाइलों में ही दम तोड़ती रहेंगी।




