ललितपुर
जयंती विशेष चौ. चरणसिंह राष्ट्रीय किसान दिवस

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती किसान दिवस पर आयोजित एक परिचर्चा को संबोधित करते हुए नेहरू महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो.भगवत नारायण शर्मा ने कहा कि किसानों के प्रिय नेता पूर्व प्रधानमंत्री चौ.चरणसिंह का नाम स्मरण होते ही खेतों और खलिहानों से उठती सौंधी सुगन्ध से मन रच बस जाता है। उनका जन्म ऐसे किसान परिवार में हुआ जिसकी दीवारें मिट्टी की और छत घासफूस की थी। वे सन् 1937 में कांग्रेस की ओर से उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधायक निर्वाचित हुए। महात्मा गांधी के ग्रामाभिमुख विचारों से बड़े प्रभावित थे। ग्रामीण अर्थशास्त्र के व्यवहारिक चिंतक और असाधारण रूप से ईमानदारी और कर्मठता के प्रतीक थे। उनका पालन पोषण सीरधर खुदकाश्त सीमान्त किसान के परिवार में हुआ था। छोटी जोत के अर्धकिसान और अर्धमजदूर देश में आज भी 80 प्रतिशत से कम नहीं हैं। त्रेता युग में दुराग्रही दुर्योधन सुई की नोंक बराबर भी जमीन खेती करने वालों को नहीं देना चाहता था। आज भी प्रकान्तर से हालात वैसे ही जस की तस बने हुए हैं। अतीत में सरकारी और महाजनी कर्ज के दो पाटों के बीच में यदि किसान न पिस रहा होता तो देश में उनकी इतनी आत्महत्याएं न होती। उ.प्र. में जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार तथा चकबंदी योजना लागू करने में चौधरी साहब का महत्पूर्ण योगदान है। किसानों की आय दूनी कर देने की सिफारिश स्वामीनाथन आयोग ने की थी। तब से केन्द्रीय और प्रान्तीय सरकारें काफी प्रयत्नशील नजर आ रहीं हैं परन्तु जमीनी हकीकत ओझल है। कोविड 19 की पहली और दूसरी लहर में यह सच्चाई उभरकर आयी है कि खाद्य तेल, खाद्यान, उर्वरक, कृषि उपकरण, डीजल और पेट्रोल के दाम बेतहाशा उछाल पर हैं। साथ ही किसानों द्वारा उत्पादित अनाज शाक-सब्जी, फल- फलारी की कीमतों से सभी रसोईघरों का मिजाज बिगड़ गया है। हमें अपने आपसे पूछना होगा कि ऐसे हालात बिना कारण तो उपस्थित नहीं हो सकते। जो किसान अनाज और शाक-सब्जी पैदा कर रहें हैं क्या बड़ी हुई कीमतों को लाभांश की कानी कौड़ी भी उनकी अंटी में अट रही है? या बड़े-बड़े बिचौलिए मलाई छान रहे हैं? निश्चित रूप से चौ. चरणसिंह द्वारा रचित ग्रामीण अर्थशास्त्र के उनके ग्रन्थों से हम समाधान जान सकते है।



