एनसीआर के सख्त नियम भी बेअसर, धूल-धुएं से बेहाल लोग,प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
कैराना। एनसीआर में वायु प्रदूषण को लेकर सख्त नियम लागू होने के बावजूद कैराना के मोहल्ला इकरामपुरा में आबादी के बीच संचालित ईंट भट्ठा खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है। भट्ठे की चिमनी से निकलता जहरीला धुआं और धूलभरी हवाओं के साथ फैलता प्रदूषण स्थानीय लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा बन चुका है।
मोहल्लावासियों का कहना है कि दिन-रात चलने वाले इस भट्ठे से निकलने वाली राख और महीन धूल पूरे क्षेत्र में फैल जाती है। तेज हवा चलने पर हालात और बिगड़ जाते हैं, धूल घरों के अंदर तक पहुंच जाती है, जिससे खाना, पानी और दैनिक जीवन तक प्रभावित हो रहा है। लोग मजबूर होकर दरवाजे-खिड़कियां बंद रखने को विवश हैं।एनसीआर में ईंट भट्ठों के संचालन के लिए पर्यावरण से जुड़े कई सख्त मानक तय हैं। नियमानुसार भट्ठा आबादी से पर्याप्त दूरी पर होना चाहिए, साथ ही “जिग-जैग तकनीक” (Zig-Zag टेक्नोलॉजी ) का उपयोग, ऊंची चिमनी, धूल नियंत्रण और प्रदूषण मानकों का पालन अनिवार्य है। इसके अलावा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से वैध अनुमति (Consent to Operate) आवश्यक होती है।वायु गुणवत्ता मानकों (PM10 और PM2.5) का पालन जरूरी है। इस सबके बावजूद मोहल्ला इकरामपुरा में संचालित भट्ठे में इन नियमों की खुलेआम अनदेखी किए जाने के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, बच्चों और बुजुर्गों में खांसी, दमा, सांस फूलना और आंखों में जलन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। कई लोगों ने बताया कि रात के समय भी भट्ठे की चिमनी से धुआं निकलता रहता है, जिससे प्रदूषण का स्तर और बढ़ जाता है। मोहल्लावासियों का आरोप है कि कई बार संबंधित विभाग और प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि आबादी के बीच संचालित इस भट्ठे को तत्काल बंद कराया जाए या इसे निर्धारित मानकों के अनुसार आबादी से दूर स्थानांतरित किया जाए। साथ ही, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए। अब बड़ा सवाल यह है कि एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के दावों के बीच क्या आम जनता को ऐसे ही जहरीली हवा में जीने के लिए छोड़ दिया जाएगा, या फिर प्रशासन इस मामले में सख्त कदम उठाएगा।

