सिंगरौली
टीएचडीसी प्रबंधन व प्रशासन के भुगतान आश्वासन के बाद अनिश्चित धरना स्थगित
भू अधिनियम के तहत बहु विस्थापितों को अतिरिक्त प्रतिकर का अधिकार

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। टीएचडीसी इण्डिया लिमिटेड के अमिलिया कोल माइंस मे बहु विस्थापित हो रहे पिड़रवाह व बंधा के कई लामबंद परिवारों ने अतिरिक्त प्रतिकर सहित अन्य मांगो को लेकर प्रस्तावित अनिश्चित धरना आंदोलन को टीएचडीसी कंपनी प्रबंधन व जिला प्रशासन के 10 दिवस मे पूर्ति करने के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया है। गत दिवस सरई, पिड़रवाह व बंधा के बहुविस्थापित ग्रामीण भू अर्जन अधिनियम 2013 के तहत कम्पनी पर अतिरिक्त प्रतिकर का लाभ नहीं देने से नाराज हो आक्रोषित थे। लेकिन जिला प्रशासन व परियोजना प्रमुख के आश्वासन पश्चात फिलहाल धरना आंदोलन स्थगित कर दिया है, लेकिन प्रबंधन को चेताया है कि निर्धारित दिवस मे यदि मांग पूरी नहीं हुई तो भविष्य मे कंपनी के कामकाज पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।यदि कंपनी ने ईमानदारी से भू अर्जन नियम के तहत मांग को पूर्ण कर लिया तो एक से अधिक बार विस्थापित हो रहे परिवारों को वर्तमान मुआवजा राशि के समक्ष अलग से अतिरिक्त प्रतिकर का लाभ मिलना तय है।
गौरतलब हो कि यदि कोई परिवार या भू मालिक एक से अधिक बार विस्थापित होता है तो ऐसे बहु विस्थापित परिवार को उसके वर्तमान सम्पति के मूल्यांकन मुआवजा राशि के आलावा उसके समतूल्य भू अर्जन अधिनियम 2013 की धारा 39 के तहत बहु विस्थापत परिवार को अतिरिक्त प्रतिकर दिए जाने का नियम है। क्यों कि उक्त अधिनियम की उक्त धारा में स्पष्ट उल्लेख है कि कलेक्टर या भू अर्जन अधिकारी ऐसे किसी कुटुम्ब को जिसे सरकार द्वारा इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन अर्जन के प्रयोजनार्थ पहले ही विस्थापित किया जा चुका है, विस्थापित नहीं करेगा।और यदि उसे इस प्रकार विस्थापित किया गया है तो वह इस अधिनियम के अधीन अवधरित प्रतिकर के समतूल्य अतिरिक्त प्रतिकर का अधिकारी होगा।
ज्ञात हो कि टीएचडीसी कंपनी के अमिलिया मे स्थापित हो रहे कोल माइंस से प्रभावित गाँव पिड़रवाह व बंधा मे ऐसे कई परिवार निवासरत है जो एनटीपीसी के पूर्व के विस्थापित हैं और अब टीएचडीसी से विस्थापित हो रहे हैं। भू अर्जन अधिनियम 2013 की धारा 39 के तहत बहु विस्थापित परिवार को वर्तमान प्रतिकर (मुआवजा) के समक्ष अतिरिक्त प्रतिकर दिए जाने का नियम है और बहु विस्थापित परिवार का अधिकार भी है। इसी नियम के तहत ग्राम पिड़रवाह व बंधा के कई परिवार जो बहु विस्थापित हो रहे है अपना अतिरिक्त प्रतिकर का अधिकार पाने लम्बी लड़ाई लड़ रहे हैं।
इस सम्बन्ध मे स्थानीय बहु विस्थापितों मे से बृजेश तिवारी, अंजनी प्रसाद तिवारी,राजेश्वर प्रसाद तिवारी आदि ने बताया कि भू अर्जन अधिनियम 2013 की धारा 39 के तहत अपना अधिकार पाने लड़ाई लड़ रहे हैं, कई बार पत्राचार करने व कई बार आश्वासन मिलने के बाद जब मांग पूरी नहीं हुई तो गत दिवस कंपनी के विरोध मे अनिश्चित धरना आंदोलन प्रदर्शन के लिए सभी बहु विस्थापित ग्राम पिड़रवाह मे एकत्रित हुए, जहाँ कंपनी प्रबंधन का कामकाज ठप कराने रणनीति बनाई जा रही थी कि जैसे ही जिला प्रशासन की ओर से तहसीलदार, एस डी एम व अमिलिया कोल माइंस के परियोजना प्रमुख ए के शर्मा व अन्य कम्पनी प्रतिनिधियों को जानकारी मिली त्वरित धरना स्थल पर पहुंचे और आश्वासन दिया कि आगामी 10 दिवस मे नियम के तहत बहु विस्थापित परिवारों का अतिरिक्त प्रतिकर का लाभ हर हाल मे दे दिया जाएगा। कम्पनी प्रबंधन के आश्वासन के बाद स्थानीय बहु विस्थापितों ने धरना तो रोक दिया लेकिन साथ ही चेताया भी है कि यदि आश्वासन दिवस मे मांग पूर्ण नहीं हुई तो अगली बार वृहद आंदोलन होगा।
अतिरिक्त प्रतिकर के लाभ से वंचित हैं अधिकांश बहु विस्थापित
भारत के औद्योगिक हब सिंगरौली मे स्थापित औद्योगिक इकाईयों से कई बार विस्थापित होने वाले परिवारों की संख्या बहुत ज्यादा हो सकती है। लेकिन जानकारी के आभाव मे अधिकांश परिवार अतिरिक्त प्रतिकर के लाभ से वंचित हैं। जिम्मेदार उक्तशय की जानकारी भी नहीं देते, ना ही अतिरिक्त प्रतिकर का लाभ ही देते हैं। टीएचडीसी के अमिलिया कोल माइंस से प्रभावित हो रहे पिड़रवाह व बंधा के बहु विस्थापितों ने लम्बी लड़ाई लड़ कर स्वयं लाभ पाने के साथ जिले के बांकी पूर्व के विस्थापित परिवारों के लिए एक रास्ता खोल दिया है। भविष्य मे यदि कोई दोबारा विस्थापित होता है तो उसे बहु विस्थापन के रूप मे मुआवजा राशि के बराबर अतिरिक्त प्रतिकर का लाभ पाने का अधिकार है।



