बेतुल

बैतूल महाविद्यालय मुलताई में महिला दिवस के अवसर पर आयोजित हुआ कार्यक्रम। 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
बैतूल शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ के अवसर पर महिलाओं को समर्पित भव्य और प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। चूंकि 8 मार्च को रविवार का अवकाश था, अतः महाविद्यालय परिवार द्वारा यह विशेष आयोजन दिनांक 09 मार्च को अत्यंत उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. कमलेश सरिया द्वारा मां सरस्वती और स्वामी विवेकानंद के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावी संचालन डॉ. कल्पना बिसन्द्रे द्वारा किया गया। अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए प्राचार्य डॉ. सरिया ने महिला सशक्तिकरण की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “समाज के सर्वांगीण और संतुलित विकास के लिए महिलाओं का सशक्त होना अनिवार्य है।” उन्होंने उपस्थित छात्राओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने हेतु प्रेरित किया। कार्यक्रम की संयोजक डॉ. ममता राजपूत एवं प्रो. तारा बारस्कर ने ‘नारी शक्ति’ के वैश्विक और स्थानीय स्वरूप पर चर्चा करते हुए कहा कि आज महिलाएँ शिक्षा, प्रशासन और खेल जैसे हर क्षेत्र में अपनी सफलता का परचम लहरा रही हैं। इस कार्यक्रम मुख्य अतिथि के रूप पधारे श्रीमती जयप्रकाशी परते ने भी महिला सशक्तिकरण पर अपने विचार व्यक्त किये। इस वर्ष महिला दिवस की थीम “Rights Justice Action for all Women and Girls” पर विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। आयोजन में महाविद्यालय के समस्त स्टाफ सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही। विशेष रूप से एन.एस.एस. प्रभारी प्रो. प्रकाश कुमार गीते, सह-संयोजक प्रो. प्रियंका भोपते, डॉ. दीपिका पीपरदे, प्रो. अंजलि सौदागर, प्रो. पूजा देशमुख एवं प्रो. प्रियंका मोहबे, श्रीमती दयामनी किस्पोट्टा, लीला धूर्वे,  रौशनी खातरकर ने भी महिला दिवस की प्रासंगिकता पर अपने विचार साझा किए। महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने इस अवसर पर बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विद्यार्थियों में अभिषेक हुरमाड़े, अर्पिता जाधव ने महिला सशक्तिकरण पर आधारित प्रभावशाली भाषण और कविताओं के माध्यम से नारी शक्ति के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रवीण डोंगरे, मीसम हुसैन, पायल कड़वे और अन्य रासेयो स्वयंसेवकों का मुख्य योगदान रहा। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी विद्यार्थियों, महाविद्यालय स्टाफ और आगंतुकों ने समाज में लैंगिक समानता (Gender Equality) बनाए रखने और महिलाओं के सम्मान की रक्षा करने का सामूहिक संकल्प लिया।
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