गाजियाबाद

एनजीटी की सख्ती के बाद भी पचहरा-नौरसपुर में खनन पर कोर्ट का शिकंजा कायम

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : पचायरा और नौरसपुर क्षेत्र में कथित अवैध बालू खनन के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बुधवार को सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाया। करीब डेढ़ घंटे चली सुनवाई में न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। खनन सुनवाई मामला सूची में चौथे क्रम पर था और सुनवाई लगभग 11:30 बजे शुरू हुई। खनन विभाग की निदेशक लखनऊ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ीं, जबकि स्थानीय अधिकारी अदालत में मौजूद रहे।
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने ग्रैप-4 लागू होने के बावजूद 2 जनवरी की रात नदी तल में जेसीबी से कथित खनन किए जाने के वीडियो पर तीखी आपत्ति जताई। ट्रोनिका सिटी चौकी प्रभारी और गाजियाबाद के खनन अधिकारी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को न्यायालय ने अपर्याप्त बताते हुए कड़ी नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि आदेशों की अवहेलना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
सरकारी पक्ष द्वारा अधिकारियों के बचाव में दिए गए तर्क भी न्यायालय को संतुष्ट नहीं कर सके। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि कानून का उल्लंघन होने पर कार्रवाई करना अदालत का दायित्व है, परिणामों की चिंता करना नहीं। उन्होंने एक पूर्व निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, दोष सिद्ध होने पर सजा दी जाती है।
उल्लेखनीय है कि 2023 से इस क्षेत्र में अवैध खनन की शिकायतें उठती रही हैं। भारतीय किसान यूनियन (अनाज) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. सचिन शर्मा ने भी इस वर्ष जनवरी में एनजीटी का रुख किया था। अदालत ने उनकी याचिका को पूर्व में लंबित याचिका के साथ जोड़ते हुए अगली सुनवाई 19 मार्च निर्धारित की है।
एनजीटी ने खनन निदेशक, जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त गाजियाबाद को आवश्यकता पड़ने पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की छूट दी है, वहीं खनन अधिकारी, एडीएम और अन्य संबंधित अधिकारियों से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। तब तक क्षेत्र में खनन पर लगी रोक अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी।
ताजा घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में सक्रिय खनन गिरोहों और प्रशासनिक तंत्र पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है। याचिकाकर्ता द्वारा हालिया कथित खनन का वीडियो और समाचार कटिंग भी न्यायालय में प्रस्तुत की गई है। अब देखना होगा कि आगामी सुनवाई में क्या दिशा-निर्देश जारी होते हैं और अवैध खनन पर स्थायी रोक लग पाती है या नहीं।
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