गाजियाबाद

लोनी गौशाला में व्यवस्थाओं की पोल खुली

नोडल अधिकारी के बावजूद हालात जस के तस

चारा, पानी और शरण की कमी से बेहाल गोवंश; साफ-सफाई और देखभाल के दावे जमीनी स्तर पर फेल
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो l
लोनी । मेरठ की गौशाला में खामियां सामने आने के बाद प्रदेश सरकार द्वारा गौशाला की देखभाल करने वालों के खिलाफ की गई सख्त कार्यवाही, एफआईआर और निलंबन जैसे कदमों के बावजूद लोनी नगरपालिका क्षेत्र में स्थित एसएलएफ, वेद बिहार की गौशालाओं  के  हालात में कोई उल्लेखनीय सुधार नजर नहीं आ रहा है। संचालन और निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त होने के बावजूद यहां गोवंश अव्यवस्था और उपेक्षा का सामना कर रहा है।
गौशाला का हाल यह बताता है कि बीमार पशुओं की देखभाल, चारे की उपलब्धता, स्वच्छता व स्वच्छ पानी और सुरक्षा से जुड़े दावे केवल कागज़ों तक सीमित दिखाई देते हैं। ठंड के मौसम में न तो फूस/पुराल की पर्याप्त व्यवस्था नजर आती है और न ही अलाव की, जिस कारण कई गोवंश खुले में ठंड झेलने को मजबूर हैं।
सबसे चिंताजनक स्थिति पेयजल की है। गौशाला परिसर के पानी के हौद में जमा बासी पानी ही पशुओं को पीने के लिए उपलब्ध है,   केयरटेकर द्वारा पशुओं के लिए ताजा पानी भी हौद भरे जाने के आदेश पर अमल नहीं किया जा रहा। इसके  लिए जिम्मेदार केयरटेकर के खिलाफ कार्यवाही ना करना अधिकारियों की लापरवाही को उजागर करता है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार गौशाला में करीब 140 से अधिक गोवंश हैं, लेकिन सीमित जगह के कारण कई पशु बैठने तक से वंचित हैं और अधिकतर समय खड़े रहने को विवश दिखाई देते हैं। चारे की उपलब्धता भी आवश्यकता के मुकाबले बेहद कम है, और जो थोड़ा बहुत हरा चारा मौजूद है वह “ऊंट के मुंह में जीरा” जैसा साबित हो रहा है।
कर्मचारियों द्वारा व्यवस्थाओं के दावे किए जाते हैं, किंतु मौके पर स्थिति इन दावों से मेल नहीं खाती। यह सवाल खड़ा होता है कि जब सरकार स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है, तब भी जमीनी हकीकत में सुधार क्यों नहीं दिख रहा।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर स्वच्छ पानी, पर्याप्त चारा, शरण व ठंड से बचाव की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित कराने की मांग की है।
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