बरेली
योगी सरकार से बरेली को मिली बड़ी सौगात, दो साल में शुद्ध पेयजल से नहीं रहेगा कोई वंचित
बरेली के 76 हजार से ज्यादा घरों में मिलेगा पीने का शुद्ध जल

265 करोड़ की पेयजल क्रांति, शहरी क्षेत्र के 40 वार्डों में सूखे नल भरेंगे, शुरू हो रही टेंडर प्रक्रिया
नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो
बरेली। जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने जानकारी दी है कि शहर के 76465 घरों में अमृत 2 की जलधारा प्रवाहित करने के लिये प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। शहरी जल निगम ने इसकी टेंडर प्रक्रिया को धरातल पर उतारने की कवायद तेज कर दी है। जिससे जल्द से जल्द परियोजना को जमीन पर उतारा जा सके। अमृत 2.0 परियोजना के अंतर्गत शहर के 76,465 घरों तक नए कनेक्शन पहुंचाए जाएंगे। दो वर्षों में शहर के पेयजल वितरण व्यवस्था की पूरी तस्वीर बदल जायेगी। 40 से अधिक वार्डों में वर्षों से चली आ रही आंशिक जलापूर्ति की समस्या भी इस योजना से समाप्त होने जा रही है। जल निगम ने वर्ष 2022-23 में शहर के उन क्षेत्रों का सर्वे कराया था। जहां आज भी शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं है। अमृत 2.0 के तहत तैयार की गई 270 करोड़ रुपये की डीपीआर को व्यव-वित्त समिति ने संशोधित कर 265 करोड़ में कैबिनेट को भेजा था। इस परियोजना के तहत शहर का पेयजल संतृप्तीकरण 51 प्रतिशत से बढ़कर 92 प्रतिशत तक पहुँच जाएगा।
अमृत 2.0 के फेस-1 में 19 नए ओवरहेड टैंक, 37 नलकूप, 302.36 किमी वितरण पाइपलाइन, 19.47 किमी राइजिंग मेन, 76465 नए गृह संयोजन, ग्राउंड वाटर रिचार्ज संरचनायें शामिल हैं। परियोजना पूरी होने पर 2011 की जनगणना वाले 80 वार्डों में से 34 पूर्णतः असंतृप्त और 21 आंशिक असंतृप्त वार्डों को पहली बार निर्बाध जलापूर्ति मिलेगी। योजना के अनुसार प्रति व्यक्ति निर्माण लागत 2980 आंकी गई है। नए कनेक्शन पर 130 रुपये मासिक टैरिफ प्रस्तावित है। वर्ष2026-27 में यह शुल्क 135 रुपये, वर्ष 2040 में 170 रुपये और वर्ष 2055 में 210 रुपये तक किया जाएगा। यह व्यवस्था शहर में दीर्घकालिक जलापूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए जरूरी है।
वर्तमान में केवल 93,194 घरों में ही कनेक्शन हैं, यानी लगभग आधी आबादी अभी भी पूर्ण जलापूर्ति से वंचित है।
जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने बताया कि अमृत 2.0 परियोजना बरेली के लिए ऐतिहासिक सौगात है। 76 हजार से अधिक घरों को पहली बार पाइपलाइन आधारित जलापूर्ति मिलेगी। निविदा प्रक्रिया इसी माह शुरू की जाएगी और जल निगम ने परियोजना को दो वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने कहा कि शहर के असंतृप्त क्षेत्रों में जल्द ही जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित कर कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे नागरिकों को वर्षों पुरानी पेयजल समस्या से मुक्ति मिल सके।

