
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
उरई (जालौन)। डकोर ब्लॉक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और फर्जी भुगतान का मामला सामने आया है। आरोप है कि ब्लॉक स्तर के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग करने से ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक, रोजगार सेवक से लेकर बीडीओ मनरेगा योजना में ऐसा भ्रष्टाचार का तड़का लगाकर अपने आर्थिक हितों को साधने लगे हुये हैं।
ऐसा ही मामला ग्राम पंचायत हरदोई गुर्जर का है जहां अनंतराम पुत्र खेमराज के खेत पर मेड़बंदी (नदी, खेत सुरक्षा कार्य) का कार्य स्वीकृत किया गया था। इस कार्य की अवधि 25 फरवरी 2026 से 10 मार्च 2026 तक थी और इसे 14 दिनों में पूरा किया गया है। मास्टर रोल संख्या 6400 के अनुसार, लगभग ₹95,000 का भुगतान 30 मजदूरों द्वारा 14 दिनों तक काम करने के नाम पर दर्शाया गया उसके लिए एनआरपी और ब्लॉक डेवलपमेंट अधिकारी ने अपना डोंगल लगा दिया है अब काम बगैर हुए ही सीधा पैसा ठेकेदार के खाते में जाएगा और पैसे का एडवांस कमीशन साहब लोग ले चुके होंगे। लेकिन जब मौके पर स्थिति की जांच की गई, तो तस्वीर पूरी तरह उलट नजर आई। जिस स्थान पर मेड़बंदी का कार्य दिखाया गया, वहां आज भी फसल खड़ी है और किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं हुआ। आरोप है कि पंचायत मित्र के द्वारा फर्जी जियो-टैग फोटो अपलोड कर भुगतान हेतु खेल खेला गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले में ब्लॉक के अधिकारियों की सीधी संलिप्तता है। आरोप यह भी है कि रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर जल्द से जल्द कथित तरीके से अवैध कमाई करने में जुटे हैं। वहीं तकनीकी सहायक अशोक कुमार पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक वह खुलेआम कहते हैं कि उनकी “ऊपर तक सेटिंग” है और शिकायत करने या खबर छपने से कोई फर्क नहीं पड़ता। यह बयान न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, यह भी दर्शाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो सरकार की योजनाएं सिर्फ कागजों में ही सीमित रह जाएंगी। नाम बदलने या नई योजनाएं लागू करने से कुछ नहीं होगा, जब तक जमीनी स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाती। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि सरकारी धन की लूट पर रोक लग सके। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर क्या कदम उठाता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

