आधुनिक संचार तकनीक पर मंथन: पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में जुटे शिक्षाविद
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मेरठ। मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एमआईईटी) के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग द्वारा “5जी व 6जी के लिए एंटीना डिजाइन” विषय पर पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का भव्य शुभारंभ हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) में किया गया। इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल में देशभर के विभिन्न प्रतिष्ठित महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों से 100 से अधिक शिक्षकों, शोधार्थियों एवं तकनीकी विशेषज्ञों ने सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई।
कार्यक्रम का उद्घाटन विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) ए. के. सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर संस्थान के चेयरमैन विष्णु शरण, वाइस चेयरमैन पुनीत अग्रवाल, निदेशक प्रो. (डॉ.) संजय कुमार सिंह तथा डीन एकेडेमिक्स डॉ. संजीव सिंह की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की महत्ता को और बढ़ाया। अपने संबोधन में अतिथियों ने आधुनिक संचार तकनीकों में एंटीना डिजाइन की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को समय की आवश्यकता बताया।
एफडीपी में विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. (डॉ.) प्रियंक शर्मा, प्रो. (डॉ.) नेहा मित्तल, प्रो. (डॉ.) आर. एस. तोमर एवं प्रवीण कुमार चक्रवर्ती सहित सभी संकाय सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम के अंतर्गत देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आमंत्रित प्रख्यात विशेषज्ञ—प्रो. (डॉ.) अशोक डे, प्रो. (डॉ.) राजीवेर सिंह यादववंशी, प्रो. (डॉ.) ए. के. गौतम, प्रो. (डॉ.) मनीषा भारती एवं डॉ. राजेश यादव—ने अपने अनुभव और शोधपरक ज्ञान से प्रतिभागियों को लाभान्वित किया।
एफडीपी के प्रथम दिवस पर विशेषज्ञों ने 5जी व 6जी संचार प्रणालियों में एंटीना डिजाइन की नवीनतम तकनीकों, उन्नत संरचनाओं तथा भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने बताया कि आगामी पीढ़ी की वायरलेस तकनीकों में उच्च दक्षता वाले एंटीना डिजाइन का महत्व लगातार बढ़ रहा है, जो तेज गति, बेहतर कनेक्टिविटी और कम लेटेंसी सुनिश्चित करने में सहायक है।
कार्यक्रम की विशेषता यह है कि प्रतिभागियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ हाई फ्रीक्वेंसी स्ट्रक्चर सिम्युलेटर सॉफ्टवेयर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। इस हैंड्स-ऑन सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को एंटीना मॉडलिंग, सिमुलेशन और विश्लेषण की उन्नत तकनीकों की व्यावहारिक समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा, जो उनके शोध एवं शिक्षण कार्य को नई दिशा प्रदान करेगा।
कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. आशीष कुमार राव ने बताया कि यह एफडीपी शिक्षकों एवं शोधार्थियों को उभरती संचार तकनीकों के साथ जोड़ने का एक प्रभावी मंच है, जहां वे विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में अपने ज्ञान एवं कौशल को अद्यतन कर सकते हैं।
संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) संजय कुमार सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम न केवल शिक्षकों की शैक्षणिक क्षमता को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि अनुसंधान और नवाचार को भी प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह कार्यक्रम प्रतिभागियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा और उन्हें वैश्विक तकनीकी परिदृश्य के अनुरूप तैयार करने में सहायक बनेगा।



