गोड्डा
जेटेट नियमावली में कुड़मालि भाषा शामिल नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण : दिनेश महतो

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
पथरगामा। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) नियमावली में कुड़मालि (कुरमाली) भाषा को शामिल नहीं किए जाने पर कुड़मि समुदाय में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। टोटेमिक कुड़मी विकास मोर्चा के जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार महतो ने इसे सरकार का दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय बताते हुए समुदाय के साथ सौतेला व्यवहार करार दिया है।
दिनेश महतो ने कहा कि कुड़मि समाज की मातृभाषा कुड़मालि है, जिसे नजरअंदाज करना उनकी पहचान और सांस्कृतिक अस्तित्व के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने बताया कि गोड्डा समेत संथाल परगना के दुमका, देवघर, साहेबगंज, पाकुड़ और जामताड़ा जिलों में कुड़मि समुदाय के लोग सदियों से निवास करते आ रहे हैं, जहां कुड़मालि भाषा व्यापक रूप से बोली जाती है। उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2025 में उपायुक्त गोड्डा के माध्यम से राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शिक्षा सचिव एवं निदेशक को ज्ञापन सौंपकर जेटेट नियमावली में कुड़मालि भाषा को शामिल करने की मांग की गई थी। बावजूद इसके अब तक इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई है। महतो ने स्पष्ट किया कि अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल किए जाने का वे सम्मान करते हैं, लेकिन कुड़मालि को बाहर रखना समझ से परे है। उन्होंने सरकार से जल्द सुधार करते हुए कुड़मालि भाषा को नियमावली में शामिल करने की मांग की है। चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि यदि समय रहते मांग पूरी नहीं की गई, तो संथाल परगना के सभी छह जिलों में कुड़मि समुदाय के बुद्धिजीवी, छात्र और युवा सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।



