ललितपुर

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी

एनसीईआरटी की जगह 10 गुना महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें थोपने का आरोप

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
ललितपुर। प्राइवेट स्कूलों द्वारा अभिभावकों के आर्थिक शोषण का मामला गरमाता जा रहा है। उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र (शुल्क विनियमन) अधिनियम 2018 की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए स्कूल संचालकों पर निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें और यूनिफॉर्म एक निश्चित दुकान से खरीदने के लिए दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस संबंध में एक पीडि़त अभिभावक ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। पिसनारी बाग निवासी राजाराम साहू ने जिलाधिकारी को बताया कि उनकी पुत्री संस्कार वैली एकेडमी में कक्षा 3 की छात्रा है। स्कूल द्वारा उन्हें कक्षा 3 की किताबें और नोटबुक एक विशेष बुक डिपो से खरीदने को कहा गया। जब उन्होंने वहां से किताबें खरीदीं, तो उनसे 3590 रुपये वसूले गए, जबकि नियमानुसार यदि कक्षा 3 की एनसीईआरटी की किताबें ली जातीं, तो उनका मूल्य मात्र 360 रुपये के आसपास होता।
न बिल दिया, न एनसीईआरटी की एक भी किताब
शिकायती पत्र में लगाए गए मुख्य आरोप है कि स्कूल प्रशासन निजी प्रकाशकों की किताबें बेचकर भारी कमीशन कमा रहे हैं, जिससे किताबों का मूल्य 10 से 15 गुना बढ़ गया है। अभिभावकों को घंटाघर स्थित दो अलग-अलग बुक डिपो से चुनिंदा दुकानों से ही सामान लेने को बाध्य किया जा रहा है। महंगी किताबें बेचने के बावजूद दुकानदार द्वारा कोई भी वैध बिल प्रदान नहीं किया गया। सीबीएसई से मान्यता प्राप्त होने के बावजूद विद्यालय में एक भी एनसीईआरटी की किताब नहीं पढ़ाई जा रही है।
मान्यता रद्द करने की मांग
अभिभावक ने पत्र में स्पष्ट किया कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम और प्रदेश सरकार के शुल्क विनियमन अधिनियम के तहत कोई भी स्कूल किसी विशेष दुकान से सामान खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। उन्होंने मांग की है कि ऐसे स्कूलों और साठगांठ करने वाले बुक सेलर्स पर तत्काल वैधानिक कार्रवाई की जाए और नियमों का पालन न करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द की जाए। इस शिकायत की प्रतियां केन्द्रीय शिक्षा मंत्री, राज्य शिक्षा मंत्री और सीबीएसई के निदेशक को भी भेजी गई हैं। राजाराम साहू ने कहा कि जनपद के सैकड़ों स्कूल सरकारी नियमों का उल्लंघन कर शिक्षा के नाम पर अभिभावकों से ठगी कर रहे हैं, जो एक गंभीर अपराध है।
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