गोड्डा

जलसा में उलेमाओं ने समाज में अमन चैन का किया दुआ

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
बसंतराय। प्रखंड क्षेत्र के राहा गांव स्थित मुमताज नगर मदरसा फैजूल कुरआन के प्रांगण में इजलास ए आम (जलसा) का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर मदरसा फैजुल कुरआन का संग-ए-बुनियाद कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रही। कार्यक्रम का आगाज कारी मो. तहसीन ने तिलावत ए कुरआन से किया। इसके बाद नात ए पाक और तकरीरों का सिलसिला शुरू हुआ। मौके पर उलेमा-ए-किराम ने अमन-चैन, मुल्क की तरक्की और खासकर बच्चों की बेहतर तालीम के लिए सामूहिक दुआ की। मंच पर मौजूद उल्मा ए किराम ने जलसा में मौजूद लोगों को संबोधित किया मौलाना मो. इकबाल कासमी, मौलाना मुफ्ती निजामुद्दीन, मौलाना मो. मुफ्ती सरवर नदीम कासमी, मौलाना मो. शम्स परवेज, मौलाना मो. शौकत एवं मौलाना मो. अब्दुल रज्जाक कासमी ने कहा इंसान की जिंदगी का असली मकसद अल्लाह की इबादत और इंसानियत की खिदमत है। उन्होंने कहा की तालीम हर इंसान के लिए जरूरी है, क्योंकि इल्म ही वह रोशनी है जो इंसान को सही और गलत की पहचान कराती है। उलेमा ए किराम ने कहा कि आज के दौर में बच्चों की दीन और दुनियावी दोनों तरह की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, ताकि वे एक अच्छे इंसान और जिम्मेदार इनसान बन सकें। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को तालीम के रास्ते पर आगे बढ़ाएं और उनमें अच्छे संस्कार डालें। अपने संबोधन में उलेमा ने आखिरत का जिक्र करते हुए कहा की यह दुनिया एक अस्थायी ठिकाना है, जबकि असल जिंदगी आखिरत की है। इंसान को अपने हर अमल का हिसाब देना होगा, इसलिए उसे सच्चाई, ईमानदारी और नेक रास्ते पर चलना चाहिए।  दुनिया दरअसल आखिरत की खेती है, यहां जो बोया जाएगा, वही वहां काटा जाएगा। उन्होंने समाज में आपसी भाईचारा, अमन-चैन और जरूरतमंदों की मदद करने पर भी जोर दिया। उलेमा ने कहा की लाचार, गरीब और बेसहारा लोगों की सहायता करना सबसे बड़ा नेक काम है और यही इंसानियत की पहचान है। कार्यक्रम में विशेष रूप से नामी ग्रामीण शायर जमशेद जौहर “शायर-ए-इस्लाम” ने शिरकत की। उन्होंने अपने बेहतरीन कलाम पेश कर लोगों का दिल जीत लिया और पूरे माहौल को रूहानी बना दिया। इस मौके पर मो. मौलवी नईम, राहा पंचायत के पंचायत समिति सदस्य इंतजार आजाद, मो. आफताब आलम, सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम देर रात तक चला और अंत में दुआ के साथ समापन किया गया।
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