गाजियाबाद
लोनी बना दुनिया का सबसे प्रदूषित हॉटस्पॉट
‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंचा AQI, प्रशासनिक कार्रवाई पर उठे सवाल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी (गाजियाबाद)। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले की लोनी तहसील इस समय देश ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में शुमार होकर शीर्ष पर बनी हुई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार यहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार 200 से 400+ के बीच दर्ज किया जा रहा है, जो ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। यह स्थिति स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।
प्रदूषण के मुख्य कारण
विशेषज्ञों के अनुसार लोनी में बढ़ते प्रदूषण के पीछे कई प्रमुख कारण जिम्मेदार हैं। इनमें अवैध फैक्ट्रियों का संचालन, ईंट-भट्टों से निकलने वाला धुआं, सड़कों की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और निर्माण कार्यों में लापरवाही शामिल हैं। दिल्ली-सहारनपुर राजमार्ग पर चल रहे निर्माण कार्य के दौरान सड़क पर पड़ी निर्माण सामग्री और पानी का छिड़काव न होने से धूल के कण बड़ी मात्रा में हवा में फैल रहे हैं।
प्रमुख प्रदूषण हॉटस्पॉट
लोनी क्षेत्र के कई इलाके प्रदूषण की गंभीर चपेट में हैं—
इंद्रपुरी, लोनी देहात: यहां PM2.5 का स्तर अत्यधिक पाया गया है, जो फेफड़ों और हृदय पर सीधा असर डालता है। सड़क निर्माण कार्य के कारण उड़ती धूल ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।
औद्योगिक क्षेत्र (रूपनगर, ट्रोनिका सिटी): यहां अवैध रूप से चल रही फैक्ट्रियां बिना मानकों के जहरीला धुआं छोड़ रही हैं।
मुख्य सड़कें: जर्जर सड़कों और भारी यातायात के कारण दिनभर धूल उड़ती रहती है, जिससे प्रदूषण और बढ़ता है।
स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव
डॉक्टरों का कहना है कि लोनी में सांस संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। अस्थमा, एलर्जी, आंखों में जलन और खांसी के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव देखा जा रहा है। स्थानीय निजी क्लीनिकों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
अन्य क्षेत्र भी प्रभावित
लोनी के अलावा गाजियाबाद के इंदिरापुरम, गोविंदपुरम और वसुंधरा जैसे इलाके भी प्रदूषण से प्रभावित हैं, हालांकि लोनी की स्थिति इन सभी क्षेत्रों से अधिक गंभीर बनी हुई है।
प्रशासनिक विफलता पर सवाल
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर प्रशासन पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। अगरोला गांव निवासी सतेन्द्र पुत्र भंवर सिंह ने तहसील, नगरपालिका, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिलाधिकारी, मुख्यमंत्री कार्यालय और प्रधानमंत्री कार्यालय तक कई शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
लोगों का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला प्रशासन और नगर पालिका की निष्क्रियता के चलते हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। अवैध औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई न होना प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
विशेषज्ञों की सलाह विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति को सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाने जरूरी हैं: अवैध फैक्ट्रियों पर सख्त कार्रवाई, निर्माण स्थलों पर नियमित पानी का छिड़काव,सड़कों की नियमित सफाई,प्रदूषण नियंत्रण नियमों का सख्ती से पालन,गंभीर चेतावनी लोनी की बिगड़ती हवा अब केवल स्थानीय समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह एक बड़े पर्यावरणीय संकट का संकेत है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह स्थिति और भयावह हो सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर लोनी को इस जहरीली हवा से कब और कैसे मुक्ति मिलेगी?


