नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
लोनी, गाजियाबाद : लोनी नगर पालिका परिषद क्षेत्र के बुद्धिजीवियों, अधिवक्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ग्राम अहमदनगर नवादा स्थित लगभग 43 से 43.69 हेक्टेयर वन विभाग की भूमि को बचाने, अवैध अतिक्रमण हटाने और लंबित सिटी फॉरेस्ट योजना को लागू करने की मांग को लेकर जिलाधिकारी गाजियाबाद को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण और वन क्षेत्र को लगातार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हो रहे नुकसान पर अपनी गंभीर चिंता जताई।
ज्ञापन में बताया गया कि उक्त भूमि वन विभाग (सोशल फॉरेस्ट्री डिवीजन) के नियंत्रणाधीन है, जहां वर्तमान में बबूल, कीकर सहित प्राकृतिक वनस्पति मौजूद है। वर्ष 2020 में जिला प्रशासन ने इस भूमि को “सिटी फॉरेस्ट” एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई थी। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से 50 लाख रुपये भी आवंटित किए गए थे। तत्कालीन जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय के निर्देश पर एसडीएम लोनी, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी और जिला वन अधिकारी की तीन सदस्यीय समिति भी गठित की गई थी।
प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि वर्तमान में नगर पालिका परिषद लोनी द्वारा नालों का गंदा पानी वन क्षेत्र में छोड़ा जा रहा है, जिससे पेड़-पौधे सूख रहे हैं और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। इसके अलावा कूड़े और सूखे पत्तों में लगाई जा रही आग से क्षेत्र का प्रदूषण स्तर लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में वन विभाग की भूमि पर खड़े कीकर के पेड़ों में आग लगने की घटना के बाद स्थानीय लोगों में चिंता और बढ़ गई है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि उक्त वन भूमि पर अवैध कब्जों और अतिक्रमण की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। स्थानीय लोगों ने भू-माफियाओं की सक्रियता तथा संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई। भूमि का स्पष्ट सीमांकन और सुरक्षा व्यवस्था न होने से वन संपदा खतरे में पड़ती जा रही है।
लोनी की खराब वायु गुणवत्ता का उल्लेख करते हुए ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 2025 में क्षेत्र का पीएम 2.5 स्तर 112.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक है। इसी कारण लोनी को “नॉन-अटेनमेंट सिटी” घोषित किया जा चुका है।
प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मांग की कि वन भूमि का तत्काल सीमांकन कराकर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, सभी अवैध अतिक्रमण हटाए जाएं, गंदे पानी की निकासी रोकी जाए तथा सूख रहे वृक्षों के संरक्षण और नए पौधरोपण की व्यवस्था की जाए। साथ ही वर्ष 2020 में प्रस्तावित सिटी फॉरेस्ट योजना को शीघ्र लागू करने और प्रदूषण नियंत्रण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की गई।
जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने वालों में सुरेंद्र कुमार एडवोकेट (अध्यक्ष, लोनी बार एसोसिएशन), सुशील डेनियल एडवोकेट, जयदीप सिंह, संदीप कुमार त्यागी, बबीता तोमर, कामना सिंह, वेदपाल सिंह, अजय कुमार, हरीश कुमार और मामराज प्रधान सहित कई स्थानीय नागरिक शामिल रहे।

