भरत पुर
सच्चा मित्र वही जो विपत्ति में काम आए, पुष्पेंद्र मिश्र
कृष्ण सुदामा की झांकी ने मोहा उपस्थित श्रोताओं का मन

बादशाह की हॉद मोक्ष धाम में सातवें दिन सुदामा चरित्र परीक्षित मोक्ष प्रसंगों का किया वर्णन
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
भुसावर : भरतपुर जिले के एतिहासिक शहरों में शामिल भुसावर कस्बे में पहली बार सुहारी सड़क मार्ग स्थित बादशाह की हौद मोक्ष धाम में पितृ आह्वान में संकल्प हेतु समस्त कस्बावासियों और आयोजक श्री ठाकुर ठाकुरानी के नेतृत्व में आयोजित की जा रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में आज 13 मई बुधवार को सातवें दिन मुख्य रुप से सुदामा चरित्र ( कृष्ण सुदामा ) और राजा परिक्षित मोक्ष की कथा का वर्णन उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं को रसपान करवाया गया। जहां उपस्थित सैकडों श्रद्वालुओं ने नृत्य कर अपनी हाजिरी लगाकर मनोकामनाएं मांगी गई । वहीं भागवत कथा के कथा वाचक पण्डित पुष्पेन्द्र मिश्र ने अपने मुखारबिन्द से सातवें दिन की कथा में भगवान श्रीकृष्ण की अलग अलग लीलाओं का वर्णन करते हुए मां देवकी के कहने पर छः पुत्रों को वापिस लाकर मां देवकी को वापस लेना,सुभद्रा हरण का आख्यान कहना और सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि मित्रता कैसे निभाई जाए। यह भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जी से समझा जा सकता है। वहीं कथा वाचक पुष्पेंन्द्र मिश्र ने कृष्ण सुदामा के प्रसंग को लेकर कहा कि किसी का वक्त अच्छा हो तो बुलावे का इन्तजार कर लेना,लेकिन किसी का वुरा वक्त चल रहा है तो बिना बुलाए उसकी सहायता के लिए कदम बढ़ा देना। कृष्ण सुदामा का प्रसंग हमें यही शिक्षा देती है कि सच्चा मित्र वही जो मुसीबत में मित्र के काम आए। वहीं भागवत कथा में सातवें दिन की कथा में भगवान श्रीकृष्ण सुदामा स्वरुप झांकी ने उपस्थित सैकडों श्रद्दालुओं खूब आनंदित किया। जहां भागवत कथा में मौजूद श्याम भक्तों ने कृष्ण सुदामा के स्वरुप में झांकी के दर्शन करते हुए भगवान से परिवार में सुख,शांति,समृद्धि की मनोकामनाएं मांगी गई। वहीं कथा वाचक के अनुसार भागवत कथा के श्रवण से मृत्यु के भय से मुक्त होकर राजा परीक्षित भगवान के परमधाम को प्राप्त होते हैं। इस दौरान भुसावर कस्बे सहित दुर दराज के क्षेत्रों से पधारें श्याम भक्तों ने कथा वाचक पण्डित पुष्पेंन्द्र मिश्र,और विभिन्न स्थानों से पधारें सन्तों,विद्वान पण्डितों एवं संगीत कलाकारों का माला,साफा पहनाकर स्वागत किया।



