पुण्यतिथि पर श्रद्धा से नमन किए गए धरती आबा बिरसा मुंडा
बिरसा के ‘अबुआ दिशोम, अबुआ राज’ के सपने को साकार करने के लिए नए उलगुलान का आह्वान

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बोकारो। भगवान बिरसा मुंडा समिति की ओर से मंगलवार को बिरसा चौक पर धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 126वीं पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस दौरान आदिवासी परंपरा एवं रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की गई तथा उपस्थित लोगों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष योगो पूर्ती ने की, जबकि संचालन संजय गहराई ने किया। पूजा-अर्चना दियूरी गंगाधर पूर्ति द्वारा संपन्न कराई गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि धरती आबा बिरसा मुंडा केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले जननायक थे। उन्होंने आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ ऐतिहासिक ‘उलगुलान’ का बिगुल फूंका था। उनका संघर्ष आज भी समाज को अन्याय और शोषण के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा देता है। वक्ताओं ने कहा कि ‘अबुआ दिशोम रे अबुआ राज’ (हमारे देश में हमारा शासन) का उद्घोष करने वाले बिरसा मुंडा ने कभी अंग्रेजी सत्ता के सामने घुटने नहीं टेके। उन्होंने जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के लिए क्रांति का मार्ग चुना। उनके नेतृत्व में चले हूल और उलगुलान आंदोलनों का ही परिणाम था कि छोटानागपुर क्षेत्र में सीएनटी एक्ट-1908, संताल परगना में एसपीटी एक्ट तथा कोल्हान क्षेत्र में विल्किंसन रूल जैसे संरक्षणात्मक कानून अस्तित्व में आए। वक्ताओं ने चिंता जताई कि आज हूल और उलगुलान के मूल उद्देश्यों और उनकी परिभाषा को बदलने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा के सपनों का झारखंड बनाने तथा जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए समाज को एकजुट होकर फिर से वैचारिक उलगुलान छेड़ने की जरूरत है। कार्यक्रम में मुख्य रूप से सब इंस्पेक्टर दिलीप टुडू, अधिवक्ता रंजीत गिरी एवं संजू समानता उपस्थित थे। वहीं समिति के माणिक राम मुंडा, दिलु सोरेन, रूपलाल हांसदा, पानबाबू सोरेन, झरीलाल पात्रा, गोपाल कृष्णा संडील, प्रधान बोदरा, रॉबिन बोदरा, संजय कुमार, सतीश जेना, रितेश होनहागा समेत कई सदस्यों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।



