भरत पुर

जब- जब पृथ्वी पर अत्याचार अधर्म बढ़ता है, तब प्रभु का अवतार होता है-कृष्णा पाठक

श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव में हुआ श्रीकृष्ण जन्म एवं नन्दोत्सव का वर्णन 

बाल स्वरुप में सजी श्रीकृष्ण की झांकी रही आकर्षण का केन्द्र 
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
भुसावर : भरतपुर जिले की वैर – भुसावर विधान सभा उपखण्ड क्षेत्र के बन्दे्श्वर महादेव मन्दिर महादेव मन्दिर बन्ध का नगला ( भुसावर) के परिसर में मलमास (पुरुषोत्म ) के पावन अवसर पर समस्त बौहरा परिवार एवं परमपिता परमात्मा की असीम कृपा से और संगक्षक रतन लाल जी बौहरा एवं ब्रम्हा देवी जी के संयुक्त तत्वाधान में 05 जून से अनवरत 12 जून तक दोपहर 01 बजे से सांय 06 बजे तक आयोजित की जा रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव में व्यास पीठ पर विराजमान नीम करोरी बाबा की शरणागत भक्त एवं जयपुर से पधारी हुई बाल ब्रह्मचारणी कथा वाचिका व्यास डॉ0 कृष्णा पाठक ने अपने मुखारबिंद से कथा का वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में अच्छे व बुरे दिन प्रभु की कृपा से ही आते हैं। प्रभु की कृपा से कुछ भी असंभव नहीं है। कृपा ना होने पर प्रभु मनुष्य को सभी सुखी से वंचित कर देते हैं। वहीं कथा वाचिका ने भगवान विष्णु के अनेक स्वरुप का वर्णन करते हुए बन्दे्श्वर महादेव मन्दिर बन्ध का नंगला परिसर को भक्तिमय कर दिया। वहीं कथा वाचिका डॉ0 कृष्णा पाठक ने भगवान श्रीकृष्ण जन्म अवतार की कथा का सजीव वर्णन करते हुए कहा कि जब- जब धरती पर अत्याचार, अधर्म बढ़ता है,तब तब प्रभु का अवतार होता है। वहीं बन्दे्श्वर महादेव मन्दिर बन्ध का नंगला के परिसर में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव उत्सव धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जहां कृष्ण जन्मोत्सव पर नन्द के घर आनन्द भयो जय कन्हैया लाल की संगीतमय गीतों पर उपस्थित हजारों क्षद्वालुओं ने नृत्य कर अपनी हाजिरी लगाकर बधाईयां बांटते हुए उत्सव का आनन्द लिया। बन्दे्श्वर महादेव मन्दिर बन्ध का नंगला में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव में वासुदेव का किरदार लोकेश अवस्थी, माता देवकी के रुप में अर्चना अवस्थी और नन्दबाबा का स्वरुप अनिल बोहरा द्वारा चरितार्थ किया गया। वहीं कथा के पंचम दिवस पर श्रीकृष्ण की बाल लीला, कालिका मर्दन, गोवर्धन पूजा, और इन्द्र का मान भंग जैसे प्रसंगों का वर्णन हुआ। वहीं कथा में भगवान श्रीकृष्ण स्वरुप की मनमोहक झांकी का चरित्र चित्रण किया गया, जहां यह मनोहरी झांकी उपस्थित हजारों श्रद्वालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केन्द्र बनी रही, और श्रद्वालु भाव विभोर होकर भजनों पर नृत्य कर अपनी हाजिरी लगाईं। कथा का विश्राम आरती के बाद प्रसादी वितरण के साथ हुआ।
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