ललितपुर

विशिष्ट कला शिविर में आकार ले रही शकुंतला

कलासाधक सीख रहे ऑयल पेंटिंग की बारीकियां

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। सिद्धन रोड स्थित कला भवन में वरिष्ठ कलाविद् ओमप्रकाश बिरथरे के निर्देशन में आयोजित विशिष्ट कला शिविर पेंटिंग विद ऑयल कलर्स में प्रतिभागी कलाकार तैल चित्रकला की विभिन्न तकनीकों का गहन प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। 24 मई से प्रारंभ हुआ यह शिविर 21 जून 2026 तक चलेगा, जिसमें 32 कलासाधक ऑयल पेंटिंग के माध्यम से चित्र निर्माण की बारीकियां सीख रहे हैं। शिविर के प्रारंभिक चरण में प्रतिभागियों को हिंदी एवं अंग्रेजी कैलीग्राफी के साथ-साथ कैनवास, एमडीएफ बोर्ड तथा भित्ति चित्रों के लिए आधार (बेस) तैयार करने की विधियां सिखाई गईं। इसके बाद कलासाधकों ने पौराणिक कथा पर आधारित शकुंतला के चित्रांकन और तैल रंगों से उसे जीवंत बनाने का अभ्यास किया। प्रतिभागियों द्वारा तैयार किए गए चित्रों में उनकी रचनात्मकता और कलात्मक दक्षता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। प्रशिक्षण के दौरान कलासाधकों को शकुंतला के जीवन और उनके ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व से भी परिचित कराया गया। बताया गया कि शकुंतला ऋषि विश्वामित्र और अप्सरा मेनका की पुत्री थीं। जन्म के बाद माता-पिता द्वारा त्याग दिए जाने पर एक पक्षी (शकुन) ने उनकी रक्षा की, जिसके कारण उनका नाम शकुंतला पड़ा। बाद में महर्षि कण्व ने उनका पालन-पोषण किया। हस्तिनापुर के राजा दुष्यंत से विवाह के बाद उनके पुत्र भरत का जन्म हुआ, जो आगे चलकर चक्रवर्ती सम्राट बने। सम्राट भरत के नाम पर ही देश का नाम भारत पड़ा। यह कथा महाभारत के आदिपर्व में वर्णित है, जिसे महाकवि कालिदास ने अपने प्रसिद्ध नाटक अभिज्ञान शाकुन्तलम में अमर कर दिया। शिविर के आयोजक एवं प्रशिक्षक ओमप्रकाश बिरथरे ने बताया कि वर्तमान में प्रशिक्षण का तीसरा चरण चल रहा है, जिसमें कलासाधक दृष्टिक्रम (पर्सपेक्टिव), कला सिद्धांतों तथा तैल रंगों के माध्यम से प्रकृति चित्रण का अभ्यास कर रहे हैं। शिविर का समय प्रतिदिन सायं 4 बजे से 6 बजे तक निर्धारित है। उन्होंने बताया कि आगामी चरण में प्रतिभागियों को एब्स्ट्रैक्ट पेंटिंग की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। कला और सृजनात्मकता को प्रोत्साहित करने वाला यह शिविर 21 जून को समापन समारोह के साथ संपन्न होगा, जिसमें प्रतिभागियों द्वारा तैयार कृतियों का प्रदर्शन भी किया जाएगा।
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