गाजियाबाद

दिल्ली स्पेशल सेल की कार्रवाई में गिरफ्तार 7 आरोपियों में से 6 लोनी क्षेत्र के

लोनी की सुरक्षा व्यवस्था संदेह के घेरे मे

राजधानी से सटे लोनी का नाम फिर आया सुर्खियों में, बाहरी अपराधियों की गतिविधियों और पुलिस निगरानी को लेकर चर्चा तेज
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : दिल्ली से सटे गाजियाबाद कमिश्नरेट के लोनी क्षेत्र का नाम एक बार फिर अपराध और सुरक्षा संबंधी चर्चाओं के केंद्र में आ गया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा हाल ही में गिरफ्तार किए गए सात आरोपियों में से छह के लोनी निवासी होने की जानकारी सामने आने के बाद क्षेत्र की कानून-व्यवस्था और निगरानी तंत्र को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक हैं
दिल्ली पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों के कथित संबंध पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों से जुड़े बताए गए हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह नेटवर्क हथियारों की तस्करी, मादक पदार्थों के कारोबार और अन्य आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने की योजना पर काम कर रहा था। इस खुलासे के बाद लोनी क्षेत्र एक बार फिर जांच एजेंसियों और आम लोगों की चर्चा का विषय बन गया है।
करीब 17 लाख से अधिक आबादी वाले लोनी की भौगोलिक स्थिति भी इसे विशेष महत्व देती है। दिल्ली की सीमा से सटा होने के कारण यहां से दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों तक पहुंचने के कई मार्ग उपलब्ध हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार घनी आबादी वाली कॉलोनियां और लगातार बढ़ती बस्तियां किसी भी बाहरी व्यक्ति के लिए आसानी से घुलने-मिलने का अवसर प्रदान करती हैं।
लोनी बॉर्डर, मंडोली, भोपुरा, खजूरी पुस्ता और सोनिया विहार जैसे मार्ग दिल्ली से सीधे संपर्क स्थापित करते हैं। वहीं कृष्णा विहार, मधुबन कॉलोनी, अमित विहार, इंदिरा एंक्लेव, जौहरीपुर, शांति नगर और डीएलएफ कॉलोनी जैसे क्षेत्रों की जटिल गलियां और संपर्क मार्ग पुलिस निगरानी को चुनौतीपूर्ण बना देते हैं।
पुलिस प्रशासन समय-समय पर किरायेदार सत्यापन और बाहरी लोगों का विवरण जुटाने के अभियान चलाता रहता है। हालांकि स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे अभियान अक्सर कुछ समय बाद धीमे पड़ जाते हैं। क्षेत्र में पहले भी विभिन्न राज्यों की पुलिस द्वारा वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी तथा कई मामलों में अपराधियों के लोनी में ठिकाने होने की जानकारी समय समय पर सामने आती रही है।
दिल्ली पुलिस के खुलासे के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में अनस त्यागी, आरिफ उर्फ प्रधान, मोहित उर्फ योगी, साबिर तथा अन्य दो आरोपी दीपक और जतन शामिल हैं। इनमें दीपक और जतन पहले से ही एक अन्य मामले में दिल्ली की मंडोली जेल में बंद बताए गए हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपियों ने दिल्ली-एनसीआर के कुछ संवेदनशील स्थानों और व्यक्तियों की रेकी भी की थी।
स्थानीय नागरिकों और जानकारों का मानना है कि यदि पुलिस, खुफिया एजेंसियां और आम जनता मिलकर बेहतर समन्वय के साथ काम करें तो क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों पर अधिक प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। सुरक्षा विशेषज्ञ भी किरायेदार सत्यापन, खुफिया तंत्र की सक्रियता और जनसहभागिता को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं।
हालिया कार्रवाई ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि राजधानी से सटे संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्क निगरानी और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है।
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