बालाघाट
जिला पंचायत सीईओ कार्यप्रणाली विवादों के घेरे मे
जिला पंचायत में मचा घमासान, सीईओ और जनप्रतिनिधि आमने-सामने

7 दिन में कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन और तालाबंदी की चेतावनी
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट(म0प्र0) : जिलापंचायत सीईओ अभिषेक शराफ की जिले मे कार्यप्रणाली शुरुआत से ही विवादों के घेरे मे रही हैँ l अब इसमें जिला सीईओ का अड़ियल रुख कहें या उनकी शासन से वाहवाही पाने की जिद जिसके चलते इन्होने अपने अधीनस्थ अधिकारी-कर्मचारी और जन-प्रतिनिधियों को नाराज कर रखा हैँ l
जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक उस समय हंगामे की भेंट चढ़ गई जब महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़े एक मुद्दे पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) अभिषेक सराफ और जनप्रतिनिधियों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। बैठक के दौरान विधायक प्रतिनिधि जीतू राजपूत द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग से संबंधित जानकारी मांगे जाने पर सीईओ द्वारा कथित रूप से गलत जानकारी प्रस्तुत किए जाने का आरोप लगाया गया। इसके बाद माहौल गर्मा गया और बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
जानकारी के अनुसार सामान्य सभा की बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं और कार्यों की समीक्षा की जा रही थी। इसी दौरान विधायक प्रतिनिधि ने महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यों और योजनाओं से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां मांगीं। आरोप है कि सीईओ अभिषेक सराफ द्वारा जो जानकारी दी गई वह तथ्यात्मक रूप से गलत थी। इस पर विधायक प्रतिनिधि सहित जिला पंचायत सदस्यों ने विरोध दर्ज कराया और सही जानकारी प्रस्तुत करने की मांग की।
बैठक से वॉकआउट करने पर और बढ़ा विवाद
बता दें कि बहस बढ़ने के बाद सीईओ अभिषेक सराफ बैठक छोड़कर बाहर चले गए। सीईओ के इस रवैये को जनप्रतिनिधियों ने सामान्य सभा और लोकतांत्रिक व्यवस्था का अपमान बताया। बैठक में मौजूद जिला पंचायत सदस्यों और विधायक प्रतिनिधि ने इसे गंभीर विषय मानते हुए नाराजगी व्यक्त की।
सीईओ के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश
घटना से आक्रोशित जनप्रतिनिधियों ने बैठक के दौरान ही सीईओ अभिषेक सराफ के खिलाफ निंदा प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उनका आरोप था कि अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के सवालों का जवाब देने और सही जानकारी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए, लेकिन बैठक में ऐसा नहीं हुआ। सदस्यों ने कहा कि इस तरह का व्यवहार जनप्रतिनिधियों की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है।
हटाने की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन
बैठक के बाद जिला पंचायत सदस्यों, जनपद पंचायत प्रतिनिधियों और अन्य जनप्रतिनिधियों ने सीईओ को पद से हटाने की मांग करते हुए शासन और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि सीईओ का कार्य व्यवहार जनप्रतिनिधियों के प्रति सहयोगात्मक नहीं है तथा बैठक में गलत जानकारी देकर भ्रम की स्थिति पैदा की गई।
सात दिनों का अल्टीमेटम
जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन और शासन को सात दिनों का अल्टीमेटम देते हुए मांग की है कि मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए तथा सीईओ को हटाया जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समयावधि में मांग पूरी नहीं की गई तो पंचायत प्रतिनिधि व्यापक आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
आंदोलन और तालाबंदी की चेतावनी
विधायक प्रतिनिधि एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने कहा कि यदि सात दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो जिलेभर के सरपंच, जनपद पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य एकजुट होकर आंदोलन करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर जिला पंचायत कार्यालय में तालाबंदी भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के सम्मान और जनता के हितों से जुड़े मुद्दों पर किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिला पंचायत की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। अब सभी की निगाहें शासन और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।



