बेतुल

संत रामपाल जी महाराज के आदेश से हुआ 55 जोड़ो का दहेज मुक्त विवाह

254 यूनिट रक्तदान व 5850 ने लिया देहदान का संकल्प

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बैतूल, मध्यप्रदेश : मध्यप्रदेश के सतलोक आश्रम बैतूल में जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के पावन सान्निध्य में परमेश्वर कबीर साहेब जी के प्रकट दिवस के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय विशाल महासमागम का आयोजन किया गया। 27, 28 और 29 जून तक चलने वाले इस तीन दिवसीय समागम में देशभर से लाखों श्रद्धालुओं ने शिरकत की। कार्यक्रम के दूसरे दिन, यानी 28 जून को आश्रम में कई परोपकारी और समाज कल्याण के कार्य किए गए, जिसने समाज के सामने रूढ़िवादिता को छोड़कर मानवता की राह पर चलने का एक बड़ा संदेश पेश किया।
अखंड पाठ, भंडारे व विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन
महासमागम की शुरुआत तीन दिवसीय अखंड पाठ के साथ हुई, जिससे पूरा आश्रम परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। समागम में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए चौबीसों घंटे शुद्ध देशी घी से निर्मित भंडारा चल रहा है जिसमें लड्डू, जलेबी, हलवा, सब्जी, पूड़ी, दाल, चावल आदि का प्रसाद वितरित किया जा रहा है। इसके साथ ही, मानव कल्याण की भावना को सर्वोपरि रखते हुए आश्रम में एक विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों में भारी उत्साह देखने को मिला और उन्होंने जिला चिकित्सालय बैतूल की टीम को 254 यूनिट रक्त डोनेट किया।
रक्तदान करने आए अनुयायियों का कहना था
“हमारे गुरुजी संत रामपाल जी महाराज हमें सतभक्ति के साथ-साथ हमेशा परमार्थ की शिक्षा देते हैं। उनकी इन्हीं दिव्य शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए हम सभी समय-समय पर रक्तदान कर मानव कल्याण के कार्यों में अपना योगदान देते हैं।”
बिना बैंड-बाजा और तामझाम के, मात्र 17 मिनट में हुए दहेज मुक्त विवाह
इस महासमागम का सबसे मुख्य और आकर्षक केंद्र रहा वहां आयोजित हुए ‘रमेनी’ यानी दहेज मुक्त विवाह। संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा से 55 जोड़े बिना किसी फिजूलखर्ची, दिखावे, बैंड-बाजे या बारात के सादगीपूर्ण तरीके से एक पवित्र रिश्ते में बंधे।
यह विवाह पूरी तरह से दहेज रहित था, जिसमें किसी भी प्रकार के लेन-देन की सख्त मनाही थी। गुरुवाणी (असुर निकंदन रमेनी) के माध्यम से मात्र 17 मिनट के भीतर विवाह की यह अनोखी और सादगीपूर्ण रस्म पूरी की गई, जो आज के समय में फिजूलखर्ची और दहेज जैसी कुरीतियों के खिलाफ एक बड़ी क्रांति है।
भव्य आध्यात्मिक प्रदर्शनी और तत्वज्ञान की चर्चा
आश्रम परिसर में महापुरुषों के जीवनपर आधारित एक भव्य आध्यात्मिक प्रदर्शनी भी लगाई गई। इस प्रदर्शनी के माध्यम से दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं को कबीर साहेब जी के प्रकट होने व उनके द्वारा की गई अद्भुत लीलाओं की जानकारी चित्रों और प्रमाणों के माध्यम से देखने को मिली।
इसके अलावा, आश्रम में आए नए श्रद्धालुओं को पवित्र सतग्रंथों (वेदों, गीता, पुराणों, कुरान और बाइबल आदि) के आधार पर संत जी के तत्वज्ञान और शास्त्रों में छुपे गूढ़ रहस्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। शास्त्रों के इस आँखों देखे प्रमाण और अद्वितीय ज्ञान से प्रभावित होकर अभी तक लगभग 3422 श्रद्धालुओं ने बुराइयां त्यागने का संकल्प लिया और संत जी से निशुल्क नामदीक्षा लेकर मोक्ष का वास्तविक मार्ग अपनाया।
समाज कल्याण के लिए देहदान का संकल्प
इस आयोजन में आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी का भी एक बड़ा उदाहरण देखने को मिला। आश्रम में आयोजित देहदान शिविर में संत रामपाल जी महाराज के 5850 अनुयायियों ने चिकित्सा विज्ञान और समाज सेवा की दिशा में आगे बढ़ते हुए स्वेच्छा से देहदान के फॉर्म भी भरे।
समागम में कई जनप्रतिनिधि व राजनेता भी आये जिन्होंने समागम की भव्यता को देखकर भूरी भूरी प्रशंसा की।
बैतूल के सतलोक आश्रम में हो रहा यह तीन दिवसीय आयोजन केवल एक धार्मिक समागम न रहकर, सामाजिक सुधार और आत्म-कल्याण का एक जीवंत प्रतीक बनकर उभर रहा है जिसका कल भोग की वाणी के साथ समापन होगा। आश्रम सेवादारों ने बताया कि पूर्ण परमात्मा के सानिध्य में होने वाला भंडारा पापनाशक होता है जिसे ग्रहण करने से हमारे कई पाप कर्मों का नाश होकर हमें सदबुद्धि प्राप्त होती है,सभी धर्म प्रेमी जनता से निवेदन है कि ऐसे पापनाशक भंडारे में आकर अपने पुण्य कर्म अवश्य बनाएं।
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