असम में छोटे चाय किसानों के लिए नया अध्याय
विश्वनाथ और बिहाली से किसान पंजीकरण अभियान की शुरुआत।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम सरकार के कृषि एवं जलसिंचन विभाग के मंत्री पीयूष हजारिका ने शुक्रवार को विश्वनाथ ज़िले के दो अलग–अलग कार्यक्रमों में छोटे चाय उत्पादकों के किसान पंजीकरण की औपचारिक शुरुआत की। यह अभियान पूरे असम में चल रहे किसान पंजीकरण पोर्टल से जुड़ा है, जिसमें अब चाय और प्लांटेशन श्रेणी की ज़मीन को भी शामिल किया गया है, ताकि छोटे चाय उत्पादकों को आधिकारिक किसान पहचान (Farmer ID) मिल सके। पहला कार्यक्रम बिहाली क्षेत्र में आयोजित सभा से शुरू हुआ, जहां मंत्री पीयूष हजारिका ने उपस्थित छोटे चाय किसानों को संबोधित करते हुए समझाया कि किसान पंजीकरण के माध्यम से उन्हें किस प्रकार सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से सीधे जोड़ा जाएगा। इस मौके पर जिला कृषि अधिकारी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, पूर्व विधायक, बागान और कृषि क्षेत्र से जुड़े गणमान्य लोग तथा किसान संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बिहाली विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले छोटे चाय उत्पादकों के लिए यही मंच पंजीकरण प्रक्रिया के औपचारिक शुभारंभ का आधार बना।दूसरा प्रमुख कार्यक्रम विश्वनाथ चारिआली के कमलाकांत नाट्य समाज प्रेक्षागृह में हुआ, जहां कृषि मंत्री ने फिर से छोटे चाय किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने पहली बार छोटे चाय उत्पादकों को औपचारिक रूप से किसान के रूप में मान्यता दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान पंजीकरण के माध्यम से इन उत्पादकों को पीएम-किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, कृषि यंत्रों पर अनुदान, उर्वरक तथा अन्य कृषि संबंधी सरकारी सुविधाओं का लाभ एक ही प्लेटफॉर्म से मिल सकेगा। मंत्री ने सभी पात्र छोटे चाय उत्पादकों से शीघ्र पंजीकरण कराने की अपील भी की। राज्य सरकार द्वारा विकसित किसान पंजीकरण पोर्टल एक केंद्रीकृत डिजिटल डाटाबेस है, जिसमें किसान की व्यक्तिगत जानकारी, आधार और भूमि अभिलेख जुड़ते हैं, ताकि सब्सिडी, क्रॉप बीमा और विभिन्न कृषि योजनाओं तक उनकी सहज पहुँच सुनिश्चित हो सके। चाय और प्लांटेशन वर्ग की ज़मीन को इस पोर्टल में शामिल करने के फैसले को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और कृषि मंत्री पीयूष हजारिका ने छोटे चाय उत्पादकों के लिए “ऐतिहासिक कदम” बताया है, क्योंकि इससे उन्हें औपचारिक किसान पहचान, सस्ती दरों पर ऋण और योजनाओं का लाभ बिना बिचौलियों के मिल सकेगा। सरकार का अनुमान है कि इस पंजीकरण प्रक्रिया के ज़रिये राज्य के लाखों छोटे चाय उत्पादक सीधे लाभान्वित होंगे, जो अब तक कई केंद्रीय और राज्य स्तरीय कृषि योजनाओं से पूर्ण रूप से जुड़ नहीं पाए थे। इस पहल से न केवल चाय उद्योग की रीढ़ माने जाने वाले छोटे चाय किसानों की आय और सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि असम के ग्रामीण अर्थतंत्र को भी दीर्घकालिक सहारा मिलेगा।



