बालाघाट
एक साल से शिक्षक विहीन झामूल के स्कूल,95 बच्चों का भविष्य अधर में
शिकायतों,जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन के बाद भी नहीं जागा प्रशासन

सरपंच ने दी स्कूल में तालाबंदी की चेतावनी
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो
बालाघाट(म0प्र0) : बालाघाट जिले के आदिवासी बाहुल्य विकासखंड बिरसा की ग्राम पंचायत झामूल में शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय में लंबे समय से स्थायी शिक्षकों के पद रिक्त पड़े होने से 95 विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्थिति यह है कि विद्यालय में पदस्थ एकमात्र शिक्षक का भी स्थानांतरण कर दिया गया, जिसके बाद बच्चों की नियमित पढ़ाई लगभग भगवान भरोसे चल रही है। तथा स्कूल कि हालात भी जर्जर है,स्कूल का नवीन भवन निर्माण कि मांग भी एक वर्ष से लगातार कर रहे हैं।
ग्राम पंचायत के सरपंच श्री गौतरिया मरावी पिछले एक वर्ष से लगातार संबंधित विभागों और जिला प्रशासन के समक्ष स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति की मांग उठा रहे हैं।
उन्होंने लिखित शिकायतें,अधिकारियों से मुलाकात,जनसुनवाई में आवेदन तथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक शिकायत दर्ज कराई,लेकिन अब तक जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे ग्रामीणों औरअभिभावकों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
सरकारी दावों की खुल रही पोल
प्रदेश सरकार आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने तथा प्रत्येक विद्यालय में शिक्षकों की उपलब्धता के बड़े-बड़े दावे करती है,लेकिन झामूल की वास्तविक स्थिति इन दावों की पोल खोलती दिखाई दे रही है। विद्यालय में पर्याप्त छात्र संख्या होने के बावजूद स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होना शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई तो बच्चों का शैक्षणिक स्तर लगातार गिरता जाएगा और आगामी परीक्षाओं के परिणाम भी प्रभावित होंगे। सबसे अधिक नुकसान उन मासूम विद्यार्थियों का हो रहा है, जिनका भविष्य सरकारी उदासीनता की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है।
एक वर्ष से लगातार संघर्ष, फिर भी समाधान नहीं
सरपंच गौतरिया मरावी ने बताया कि 29 जुलाई 2025 को सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग एवं कलेक्टर बालाघाट को लिखित शिकायत देकर स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की गई थी। कार्रवाई नहीं होने पर 22 जुलाई 2026 को पुनः जिला शिक्षा अधिकारी,सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग,खंड विकास अधिकारी बिरसा,प्राचार्य संकुल दमोह तथा कलेक्टर जनसुनवाई में अलग-अलग आवेदन प्रस्तुत किए गए,लेकिन किसी स्तर पर समाधान नहीं हुआ।
जब सभी प्रयास विफल रहे तो मुख्यमंत्री सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज करवाई गई है जिसका शिकायत क्रमांक 39348192 है जो वर्तमान में भी लंबित है।इसके बावजूद संबंधित विभाग द्वारा कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
निर्वाचित जनप्रतिनिधि की शिकायत भी बेअसर
सरपंच का कहना है कि यदि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि की लगातार शिकायतों और अनुरोधों को भी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है,तो आम नागरिकों की समस्याओं का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।उनका आरोप है कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की उदासीनता के कारण गांव के बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है।
ग्रामीणों में बढ़ रहा रोष, आंदोलन की चेतावनी
लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों और अभिभावकों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। उनका कहना है कि आदिवासी क्षेत्र के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का समान अधिकार है,लेकिन झामूल के विद्यार्थियों को यह अधिकार नहीं मिल पा रहा है।
सरपंच गौतरिया मरावी ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही विद्यालय में स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई तो ग्रामवासीयों के साथ मिलकर अतिशीघ्र ही स्कूल में तालाबंदी करने को मजबूर होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की होगी।
अब प्रशासन की परीक्षा
झामूल के 95 बच्चों का भविष्य अब जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग के निर्णय पर निर्भर है।सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी एक वर्ष से लंबित इस गंभीर समस्या का समाधान करेंगे,या फिर आदिवासी अंचल के बच्चे शिक्षक विहीन शिक्षा व्यवस्था केभरोसे ही अपना भविष्य संवारने को मजबूर रहेंगे?
इनका कहना है-
“गांव के सभी बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले,इसके लिए पिछले एक वर्ष से लगातार प्रशासन के समक्ष स्थायी शिक्षक तथा बेहतर विघालय का निर्माण कि मांग कर रहे हैं। कई शिकायतें और सीएम हेल्पलाइन में भी आवेदन किया गया,लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।यदि जल्द स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होती है तो ग्रामीणों के साथ स्कूल में तालाबंदी की जाएगी,जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।”
गौतरिया मरावी
सरपंच
ग्राम पंचायत झामूल




