गाजियाबाद

लोनी की कालोनियों में पानी, राजनीति में ‘इतिहास’ की रवानी! 

चुनाव आते ही फिर जागा । अपरकोट का मुद्दा

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : विधानसभा चुनाव की आहट होते ही लोनी की राजनीति में एक बार फिर अपरकोट (ऊँचा किला) का मुद्दा सुर्खियों में है। लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर द्वारा भारतीय पुरातत्व विभाग को पत्र लिखकर अपरकोट के वैज्ञानिक सर्वेक्षण, उत्खनन और संरक्षण की मांग की गई है। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि क्या चुनावी मौसम में ही राजनीतिक लोगों को इतिहास याद आता है और चुनाव खत्म होते ही इतिहास फिर  फाइलों में दफन हो जाता है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि भाजपा विधायक द्वारा पिछले चुनाव में भी अपरकोट का मुद्दा पूरे जोर-शोर से उछाला गया था। चुनाव निपटते ही यह मुद्दा भी ठंडे बस्ते में चला गया। अब जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे फिर वही मुद्दा सामने आने लगा है। इस कारण क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं यह चुनावी शतरंज की एक और चाल तो नहीं, जिसमें असली मुद्दों से जनता का ध्यान हटाकर भावनात्मक बहस को पुनः जन्म दिया जा सके। सबसे बड़ी
विडंबना यह है कि एक ओर लोनी की जनता आज भी जलभराव, अघोषित विद्युत कटौती,टूटी सड़कें, जाम, गंदगी, सीवर और पेयजल, व राशनकार्ड जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रही है। वहीं दर्जनों कॉलोनियों में बारिश का पानी इस कदर भरा हुआ है कि गलियां तालाब बन चुकी हैं। लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो गया है। बच्चे गंदे पानी से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं और बीमारियों का खतरा दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है।

दूसरी ओर, जनता पूछ रही है कि क्या इन समस्याओं का समाधान राजनैतिक दलों के चुनावी एजेंडे में भी कहीं है, या फिर हर चुनाव में कोई नया भावनात्मक मुद्दा उछालकर असली सवालों को दरकिनार कर इन्हें किनारे लगाने की कोशिश की जाएगी? लोगों का कहना है कि जब सड़कें पानी में डूबी हों, नालियां उफन रही हों और नागरिक बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हों, तब राजनीतिक चर्चा का केंद्र विकास होना चाहिए, न कि ऐसा विवाद जो समाज में अनावश्यक रूप से तनाव पैदा करे।

क्षेत्र के कई जागरूक नागरिकों का कहना है कि इतिहास और पुरातात्विक धरोहरों का संरक्षण अवश्य होना चाहिए, लेकिन यह कार्य विशेषज्ञों और पुरातत्व विभाग के वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर होना चाहिए, न कि चुनावी मौसम में राजनीतिक लोगों की भावनाओं की राजनीति का हथियार बनकर।
लोनी में अब यह सवाल भी तंज के रूप में पूछा जाने लगा है,”क्या हर चुनाव में जनता को नई कहानी सुनाई जाएगी और पुरानी समस्याएं वहीं की वहीं अपना दम तोड देगी ?” क्योंकि जनता को अब लोनी के इतिहास से ज्यादा अपने वर्तमान की चिंता है। उसे पुरातत्व की खुदाई से पहले अपनी गलियों में भरे पानी की निकासी चाहिए।
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button