राष्ट्रीयलखनऊ

ई-20 पेट्रोल से गाड़ियों के पार्ट्स खराब होने का दावा

बढ़ी पार्ट्स की खपत; बंद हो जा रही हैं गाड़ियां

लखनऊ । राजधानी में एक माह से वाहनों में खराबी के मामले ज्यादा ही सामने आने लगे हैं। इसके पीछे पेट्रोल में हुए बदलाव की वजह सामने आ रही है।
राजधानी में एक माह से वाहनों में खराबी के मामले ज्यादा ही सामने आने लगे हैं। इससे स्पेयर पार्ट्स की खपत में तेजी से वृद्धि हुई है। काबोर्रेटर, वाल्व, फिल्टर और वायरिंग सेट की मांग में 50 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। स्पेयर पार्ट्स की खपत बढ़ने के कारण डुप्लीकेट सामान का बाजार भी गर्म हो गया है।
अलीगंज के पुरनिया और लालबाग के आॅटो मार्केट में खरीदारों की भारी भीड़ देखी गई। इनमें वाहन मालिकों से ज्यादा कारीगर थे, जो मुख्य रूप से बाइक व स्कूटी के काबोर्रेटर, पिस्टन, वाल्व, फिल्टर और वायरिंग सेट की मांग कर रहे थे। कारीगरों ने बताया कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण बाइक और स्कूटी में खराबी आ रही है, जिससे प्लास्टिक के उपकरण भी प्रभावित हो रहे हैं। कारोबारियों के अनुसार, एक महीने में इन स्पेयर पार्ट्स की खपत 50 फीसदी बढ़ गई है।
बीएस-6 वाहनों पर अधिक असर-अलीगंज के स्पेयर पार्ट्स कारोबारी जसपाल सिंह ने बताया कि बीएस-6 दोपहिया वाहन सवारों को सबसे ज्यादा झटका लग रहा है। बीएस-6 के ज्यादातर दोपहिया वाहन इलेक्ट्रॉनिक होने के कारण पेट्रोल में मिलावट से खराब हो रहे हैं। उन्होंने पेट्रोल में एथनॉल के अलावा अन्य पदार्थों की मिलावट की जांच की मांग की।
कंपनी में ही ठीक हो रहे वाहन
ई-20 पेट्रोल से गाड़ियों के खराब होने का किया जा रहा दावा-कारीगर अनवर ने बताया कि बीएस-6 बाइक और स्कूटी की खराबी सिर्फ कंपनी में ही ठीक हो पा रही है। इससे वाहन मालिकों को अधिक खर्च करना पड़ रहा है। शनिवार को राजधानी में कई लोग अपनी बाइक को धक्का मारकर कारीगर के पास ले जा रहे थे, तो कई स्कूटी में किक मार-मार कर बेहाल थे।
दोपहिया वाहन के स्पेयर पार्ट्स
स्पेयर पार्ट्स कीमत (रुपये में)
काबोर्रेटर 1600-2500
पिस्टन 600-800
वाल्व 350-500
फिल्टर 300-400
पेट्रोल में एथेनॉल के मिश्रण की चचार्एं तेज हैं। हर कोई इससे होने वाले फायदे और नुकसान को लेकर चिंतित है। उधर, मैकेनिकल इंजीनियरिंग के विशेषज्ञों का दावा है कि पांच से छह वर्ष पुराने वाहनों के इंजन पर एथेनॉल विपरीत असर डाल रहा है, लेकिन नए इंजन वाली गाड़ियां पूरी ऊर्जा के साथ रफ्तार भर रही हैं और उन पर किसी तरह का खास असर नहीं है।
हीवेट पॉलिटेक्निक में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रभारी एमपी सिंह के अनुसार, पुराने इंजनों में सामान्य पेट्रोल की जगह एथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल इंजन के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा रहा है। पुराने इंजन, खासकर बीएस-4, 100 प्रतिशत पेट्रोलियम आधारित ईंधन के लिए डिजाइन किए गए हैं। इससे इंजन के कई पार्ट्स प्रभावित हो रहे हैं। इसके मुख्य लक्षण और नुकसान में रबर और प्लास्टिक के हिस्सों का गलना। हाइड्रोस्कोपिक प्रकृति की वजह से नमी को सोखना और पानी का टंकी के निचले हिस्से में बैठना, जिससे जंग लगने का खतरा अधिक रहता है।
फ्यूल टैंक, काबोर्रेटर के अंदरूनी हिस्सों और धातुओं में जंग लगना। इंजन का अत्यधिक गर्म होना और माइलेज कम देना है। हालांकि, बीएस-5 और उसके बाद वाले इंजन पर एथेनॉल मिश्रित ईंधन खास असर नहीं डाल रहा है। इसमें उन्नत ईसीयू और सेंसर्स, बेहतर फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम होने से इंजन के परफॉरमेंस पर बुरा प्रभाव नहीं पड़ता, नए इंजनों के वाल्व और वाल्व सीट्स अधिक मजबूत होने की वजह से धातुओं में जंग नहीं लग रही है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button